बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चन्द्र पांडेय ने कहा कि शोधकर्ता में खोजबीन की भावना का होना आवश्यक है। प्रकृति ने आपको अच्छा कार्य करने के लिए बनाया है। कुछ बेहतर करने की कोशिश सदैव करते रहना चाहिए।
पूविवि में शोध प्राविधि एवं कम्प्यूटर अनुप्रयोग विषयक कार्यशाला में 21वीं सदी में सीखने की चुनौतियां विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संबंधित विषय में जो कुछ भी अनकही है उसे तथ्यों के साथ प्रस्फ ुटित करना है। कठिनाइयां आएगी लेकिन सर्वश्रेष्ठ बनना है तो अपने द्वारा की गई त्रुटियों को सुधारते हुए बेहतर करने के लिए संकल्पित होना होगा।
बीएचयू शिक्षाशास्त्र की प्रो. गीता सिंह, दर्शनशास्त्र विभाग प्रो. डी. गंगाधर, काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. रमाशंकर त्रिपाठी एवं इलाहाबाद डिग्री कालेज के डा. अतुल सिंह ने शोध प्राविधि सांख्यिकी डाटा एनालिसिस, डाटा प्रजेंटेशन पर प्रकाश डाला।
डा. मानस पांडेय एवं डा. मनोज मिश्र ने शोधार्थियों को भाषा के महत्व, साहित्य की समीक्षा एवं सन्दर्भ ग्रन्थ सूची तैयार करने की विधि पर विस्तार,पूर्वक जानकारी दी। डा. विद्युत कुमार मल ने शोध गंगा के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
इस अवसर पर समन्वयक डा. शिवशंकर सिंह, डा. राकेश सिंह, डा. नुपूर तिवारी, डा.अमरेन्द्र सिंह, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा.अवध बिहारी सिंह, डा.सुनील कुमार, डा. धर्मेन्द्र सिंह, अनिल श्रीवास्तव, श्याम श्रीवास्तव, आनन्द सिंह, पंकज सिंह मौजूद रहे। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया। स्वागत आयोजन सचिव डा. वन्दना राय एवं आभार डा. आशुतोष सिंह ने जताया।