नगर के रासमंडल में ब्राह्मण चेतना समिति के तहत तुलसी जयंती समारोह के आयोजन में शामिल लोग।
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जौनपुर। जिले के विभिन्न संस्थाओं की तरफ से बृहस्पतिवार को विभिन्न संस्थाओं की तरफ से तुलसीदास व मुंशी प्रेमचंद की जयंती का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि मानस को ठीक करना है तो हर घर में रामचरित मानस पढ़ी जानी चाहिए। ब्राह्मण चेतना समिति के तत्वावधान में डॉ. रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी के संयोजन में रासमंडल स्थित कार्यालय पर तुलसीदास जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को मानस मराल प्रोफेसर आरपी ओझा ने बड़े ही मार्मिक प्रसंग से प्रभु श्रीराम व सीता के प्रेम तत्व को सुनाया। उन्होंने मानस की महत्ता को विविध रूप से समझाया। अध्यक्षता कर रहे पंडित रामकृष्ण त्रिपाठी ने तुलसी के जीवन की आत्मकथा को विस्तार दिया। मुख्य अतिथि श्रीपति उपाध्याय ने राम नाम के महत्व को बताया। सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने कहा कि यह केवल काव्य सुख ही नहीं देता, बल्कि जीवन संचालन की विधा बतलाता है। पूर्व लोक सेवा आयोग सदस्य प्रोफेसर आरएन त्रिपाठी ने भी रामचरित मानस के बारे में बताया। इस मौके पर प्रभाकर त्रिपाठी, लाल बिहारी त्रिपाठी, डॉ.रामअवध यादव, धर्मदत्त उपाध्याय, अजय कुमार त्रिपाठी, अश्विनी कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे। उधर, गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर एक संयुक्त साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन डॉ.महेंद्र कुमार त्रिपाठी के कन्हईपुर स्थित आवास पर किया गया।
टीडी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि तुलसीदास लोकआस्था के कवि हैं, जिन्होंने रामचरितमानस के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक एकता का भी संदेश दिया। वहीं मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी कथा साहित्य को यथार्थ और सामाजिक सरोकारों से जोड़कर जनमानस के करीब पहुंचाया।
अध्यक्षता करते हुए टीडी कॉलेज के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो.हरिओम त्रिपाठी ने तुलसीदास को संस्कृति के कवि और प्रेमचंद को समाज का दर्पण बताया। विशिष्ट वक्ता टीडी कॉलेज हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजदेव दुबे ने कहा कि प्रेमचंद और तुलसीदास दोनों ही जनता की भाषा में लिखते हुए जनसरोकारों को साहित्य का विषय बनाते हैं। समाजशास्त्र विभाग के डॉ.संतोष कुमार ने तुलसी और प्रेमचंद को दो ऐसे स्तंभ बताया, जिन्होंने भारत की आत्मा को अपनी रचनाओं में जीवित रखा।
इस मौके पर मडियाहूं पीजी कॉलेज से डॉ.रत्नेश कुमार त्रिपाठी, डॉ.मनोज यादव, दिग्विजय सिंह, सीमा त्रिपाठी, शिव कुमार सिंह, सुधीर त्रिपाठी व अंकिता तिवारी ने भी दोनों साहित्यकारों की कालजयी रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।