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जिला जेले की सुरक्षा राम भरोसे, कैदी ज्यादा रक्षक कम

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जौनपुर। जिला कारागार में भी गाजीपुर जैसी घटना हो जाए तो कोई ताज्जुब नहीं। यहां जेल की सुरक्षा मानक में पहले से ही कमी है, साथ ही अब उसी किफायती व्यवस्था में अस्थाई जेल की भी निगरानी करनी पड़ रही है। संसाधनों की कमी के बावजूद गाजीपुर की घटना के बाद जिला कारागार में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
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जिला जेल में 320 बंदियों के रखने की क्षमता है और यहां सिपाही और हेड कांस्टेबल समेत 110 बंदी रक्षकों का पद है। लेकिन इस जेल में मौजूदा समय में 1156 बंदी रखे गए हैं और उनकी निगरानी के लिए सिपाही और हेड कांस्टेबल समेत सिर्फ 50 बंदी रक्षक तैनात है। सभी से आठ आठ घंटे की ड्यूटी ली जाती है यानी कि एक शिफ्ट में महज 17 बंदी रक्षक ही ड्यूटी पर रहते हैं। इसमें भी इन दिनों 15 बंदी रक्षक की ड्यूटी प्रसाद इंजीनियरिंग कॉलेज में बनाई गई अस्थाई जेल में लगा दी गई है। अब नए बंदियों को अस्थाई जेल में ही रखा जा रहा है। वहां 14 दिन का क्वारंटीन पूरा करने के बाद ही किसी बंदी को जिला कारागार में लाया जाएगा। अस्थाई जेल में पहले से ही 43 बंदी तब्लीगी जमात के हैं, जबकि पिछले दो दिनों में तीस बंदी और भेजे गए हैं। यानी अस्थाई जेेल में कुल 73 बंदी रखे गए हैं। जिला कारागार में सुरक्षा की ऐसी लचर व्यवस्था तब है जब इस जेल में श्रमजीवी विस्फोट कांड में फांसी की सजा पाए बांग्लादेशी आतंकी सहित कई खुंखार अपराधी भी रखे गए हैं।
वर्ष 2005 में फरार हुए थे तीन बंदी
जिला कारागार से बंदियों के फरार होने की घटना पर गौर करें तो वर्ष 2005 में यहां से तीन बंदी फरार हुए थे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने फरार तीनों बंदियों राजेंद्र, जयप्रकाश, और राजदेव को मार गिराया था। जेल में मोबाइल का इस्तेमाल भी खूब हो रहा है। टू जी जैमर फोर-जी नेटवर्क को पकड़ पाने में नाकाम हैं।
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गर्मी के दिनों में जेल की निगरानी में कठिनाई और बढ़ जाती है। यहां बंदी रक्षकों की संख्या मानक से पचास फीसदी कम है। बंदी रक्षकों मानक पूरा करने के लिए कई बार शासन से डिमांड की जा चुकी है। फिलहाल सीमित संसाधनों में ही दिन रात जेल की निगरानी की जा रही है। -राजकुमार, जेलर, जिला जेल।
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