वाराणसी। लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढ़ें। तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा...। यानी धनुष को कब उठाया, कब चढ़ाया और कब खींचा, इसका किसी को पता नहीं लगा। सबने श्रीरामजी को खड़े देखा। उसी क्षण श्री रामजी ने धनुष को बीच से तोड़ डाला।
शुक्रवार को शारदीय नवरात्र की द्वितीया तिथि पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में पहली बार रामलीला हुई। धनुष यज्ञ की लीला में काशी रंगमंच कला परिषद सिधौना के कलाकारों ने मंदिर चौक पर मां सीता स्वयंवर, धनुष भंग, परशुराम संवाद के प्रसंग की लीला हुई। आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने रामलीला की शुरुआत दीप जलाकर की। लगभग चार घंटे तक रामलीला के अलग-अलग प्रसंगों के श्रद्धालु साक्षी बने। समापन श्री राम और माता सीता की आरती से हुआ। मंचन में कार्यक्रम संयोजक कृष्णानंद सिंह, संवाद संयोजक अनिल सिंह, लीला व्यास शिवाजी मिश्रा, राम की भूमिका यथार्थ मिश्रा, लक्ष्मण सूर्यप्रताप सिंह, जनक की भूमिका में आशुतोष मिश्रा और परशुराम की भूमिका करुणाशंकर मिश्रा ने निभाई।