जौनपुर। कवि, लेखक, चित्रकार, अनुवादक अजय कुमार की स्मृति दिवस पर रविवार को हिंदी भवन में राग जौनपुरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दो सत्रों में हुए कार्यक्रम में अजय कुमार की किताब राग जौनपुरी पर परिचर्चा के साथ कवि सम्मेलन व मुशायरा हुआ। वक्ताओं ने कहा कि अजय कुमार का लेखन एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन है।
जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम के पहले सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो अवधेश प्रधान ने कहा कि राग जौनपुरी में जनता का इतिहास है। वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक प्रभात कुमार ने कहा कि शहरों पर लिखी गई किताबों से राग जौनपुरी इस मायने में अलग है कि इसमें जनसाधारण की अपने शहर को देखने समझने का नजरिया है। किताब की भाषा बोलचाल की भाषा है। उन्होंने किताब में लोकसंगीत के पक्ष को विशेष रूप से रेखांकित किया और कहा कि इस पर और ज्यादा और बार-बार बातचीत होनी चाहिए।
वाराणसी से आए ट्रेड यूनियन लीडर एवं लेखक वीके सिंह, शायर अहमद निसार, आईपीएस अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने कहा कि अजय कुमार के लेखन में सादगी साफ़ तौर पर दिखती है। दिल्ली से ऑनलाइन जुड़ीं इतिहासकार कनिका सिंह ने कहा कि राग जौनपुरी में आलोचनात्मक विवेक व लोकतांत्रिकता है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रणय कृष्ण ने कहा कि अजय कुमार एक एक दरख़्त की तरह हैं। बीएचयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप , जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर, आलोक श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन वरिष्ठ पत्रकार केके पांडेय ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में इबरत मछलीशहरी, धीरेंद्र पटेल, रूपम मिश्र, प्रतिमा मौर्य, अहमद हफीज, आलम ग़ाज़ीपुरी, विभा तिवारी, अजय विक्रम सिंह, आरपी सोनकर,असीम मछलीशहरी, मोनिस जौनपुरी, प्रमोद वाचस्पति, रामजीत मिश्र, प्रतीक मिश्र, अमृत प्रकाश प्रमुख थे।