वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल रूट पर शनिवार को जंघई और नीभापुर स्टेशन के बीच टूटी पटरी से दो पैसेंजर ट्रेनें और एक मालगाड़ी धड़धड़ाते हुए निकल गईं। संयोग था कि हादसा नहीं हुआ।
आशंका जताई जा रही है कि अगर पटरी पहले से टूटी रही होगी तो दिल्ली से वाराणसी जाने वाली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस भी इसी से गुजरी होगी।
जानकारी होने के बाद ट्रेनों को काशन पर चलाया गया और कर्मचारियों ने रेलवे ट्रैक की मरम्मत की। वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल रूट पर शनिवार को जंघई और नीभापुर स्टेशन के बीच गरियांव भुड़सापुर गांव के समीप रेलवे लाइन टूट गई थी।
सुबह साढ़े छह बजे प्रतापगढ़ से वाराणसी जाने वाली पीवी पैसेंजर और पौने सात बजे लखनऊ से वाराणसी जाने वाली एलवी पैसेंजर गुजरी। इससे पूर्व सुबह करीब छह बजे एक मालगाड़ी भी इसी ट्रैक से गुजरी थी। सुबह टहलने के लिए
निकले ग्रामीणों की नजर ट्रैक पर पड़ी तो इसकी जानकारी जंघई स्टेशन अधीक्षक कोमल सिंह को दी। इसके बाद पीडब्ल्यूआई एसके पांडेय मौके पर पहुंचे और ट्रैक मरम्मत शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि ट्रैक का जोड़ खुल गया है। ट्रेनें 30 किमी प्रति घंटे से कम रफ्तार से गुजारी जा सकती हैं। इसके चलते शाम साढ़े सात बजे के बाद देहरादून-वाराणसी जनता एक्सप्रेस, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर, रायबरेली-जौनपुर
इंटरसिटी पैसेंजर आदि गाड़ियों को काशन पर गुजारा गया। देर शाम तक रेलकर्मी पटरी की मरम्मत में जुटे रहे। दोपहर बाद दो से साढ़े तीन बजे तक रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद रहा। हालांकि स्टेशन अधीक्षक कोमल सिंह ने कहा कि ट्रैक खराब होने के कारण कोई ट्रेन लेट नहीं हुई।