समूह की महिलाओं के बनाए गए उत्पादों को अब मॉल व मार्ट के जरिये बाजार दिया जाएगा। एक ही छत के नीचे उनके स्वदेशी उत्पाद मिलेंगे। इसके लिए एनआरएलएम की ओर से जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बन रहा हैं। समूहों से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। जिले में 200 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से अलग-अलग उत्पाद बनाए जा रहे हैं। वहीं 150 से ज्यादा समूह सेवा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उपायुक्त स्वरोजगार जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पहले चरण में शहर में ही सखी मार्ट स्थापित किया जाएगा। जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू है। संवाद