सिकरारा। सीसीएमबी हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सचिन सिंह ने कहा कि डीएनए वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह ने विश्व पटल पर अपने जिले को नई पहचान दिलाई। उन्होंने बीएचयू से पीएचडी की थी और वहीं के कुलपति भी बनाए गए थे। अपने आविष्कारों के माध्यम से उन्होंने देश ही नहीं दुनिया में जौनपुर का नाम रोशन किया। कलवारी स्थित जीनोम फाउंडेशन में बृहस्पतिवार को आयोजित डॉ. लालजी सिंह की तीसरी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वे बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सीसीएमबी हैदराबाद के निदेशक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने नैना साहनी तंदूर हत्या कांड, पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी हत्या कांड की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को डीएनए के माध्यम से हल करते हुए न्यायालय में इसे साक्ष्य के रूप में मान्यता दिलाई। जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। वन्य जीव संरक्षण तथा आदिम जातियों के डीएनए पर भी उन्होंने नए आविष्कार किए जो भावी पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डा. लालजी सिंह एक महान वैज्ञानिक होने के साथ साथ सही मायने में मानवता के सच्चे उपासक थे। गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं व जेनेटिक जटिल बीमारियों के क्लिनिकल जांच के लिए जीनोम फाउंडेशन की स्थापना उनकी दूरगामी सोच का परिणाम है।
इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, बीएचयू के प्रोफेसर तथा जीनोम फाउंडेशन के एडवाइजर डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे, वरिष्ठ साइंटिस्ट डॉ. संजीव मौर्य, डॉ. आशीष सिंह मौजूद रहे। प्रारम्भ में राम अचल सिंह ने डॉ. लालजी सिंह के चित्र पर धूप दीप जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की। सुंदर कांड तथा शांति पाठ के पश्चात हवन हुआ। कार्यक्रम में डॉ अरुण कुमार, रवींद्र सिंह, रमेश सिंह, स्वामी नाथ मिश्र, धीरू पांडेय ,संजीव सिंह, मुंशी लाल मौजूद रहे। स्वागत जीनोम फाउंडेशन के समन्वयक अरुण कुमार तथा आभार ज्ञापन अमिताभ सिंह ने किया।