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Jaunpur News: कंकड़-पत्थरों पर खेलकर डॉक्टर बनने की तैयारी

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करंजाकला। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को जहां एक ओर आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का हिस्सा बनने का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बुनियादी खेल सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज परिसर में खेल का समुचित मैदान न होने के कारण भविष्य के डॉक्टरों को कंकड़, ईंट और पत्थरों से भरी असमतल जमीन पर खेलना पड़ रहा है, जो न केवल उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह है बल्कि गंभीर चोटों का खतरा भी बढ़ा रहा है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र बताते हैं कि खेल शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए उतना ही जरूरी है जितनी पढ़ाई, लेकिन मौजूदा हालात में खेल गतिविधियां मजबूरी बनकर रह गई हैं। अधूरा निर्माण कार्य और मैदान का समतलीकरण न होने से खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है। कई बार अभ्यास के दौरान खिलाड़ी चोटिल भी हो चुके हैं, इसके बावजूद उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि वर्ष 2014 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के समय तैयार किए गए मूल नक्शे में खेल मैदान की स्पष्ट व्यवस्था की गई थी। शासन स्तर पर इसे स्वीकृति भी मिली थी, लेकिन बजट की कमी और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर मैदान का निर्माण वर्षों से टाला जाता रहा। नतीजा यह है कि कॉलेज में अध्ययनरत लगभग 500 छात्र-छात्राएं और मेडिकल स्टाफ आज भी खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। खेल सुविधाओं के अभाव का सीधा असर खिलाड़ियों की प्रतिभा और खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का दबाव पहले से ही अधिक होता है, ऐसे में यदि खेल का उचित वातावरण न मिले तो मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।
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