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होली पर ‘जहर’ परोसने की तैयारी : 172 सैंपल फेल, 153 दुकानदारों पर केस

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जौनपुर। मिलावटी खाद्य पदार्थ होली पर लोगों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। होली के मद्देनजर खरीदारी को लेकर लोगों को सावधान होने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से बीते 10 महीने के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों लिए गए खाद्य सामग्री के 172 नमूने फेल हो गए हैं। इनमें से 153 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जबकि 19 के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है। त्योहार के समय ज्यादा मुनाफे की लालच में दुकानदार खाद्य पदार्थों में जमकर मिलावट कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की टीम मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए अभियान चला रही है। मिलावटखोरी पर नजर रखने के लिए टीमें गठित कर दी गईं हैं। होली नजदीक है। लोग जरूरत के सामान पहले ही खरीदने में जुट गए हैं। गुझिया, मिठाई, नमकीन समेत अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ गई है। ऐसे में दुकानदार ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में दूध, खोवा, शरबत, नमकीन व अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट कर रहे हैं। खोवा में मैदा व आलू की मिलावट की जा रही है। वहीं मिठाई को आकर्षक बनाने के लिए रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त देवाशीष उपाध्याय ने कहा कि अभियान चलाया जा रहा है, सैंपल की जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाएगी। मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने एक अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक जिले में 402 प्रतिष्ठानों पर छापे मारे। इस दौरान कुल 1886 प्रतिष्ठानों की जांच कर 512 नमूने लिए गए। इनमें से 295 नमूनों की रिपोर्ट आ गई है। 172 नमूने फेल हुए हैं। इनमें से 131 के खिलाफ एडीएम कोर्ट में और 22 मामले एसीजेएम कोर्ट में चल रहे हैं। 19 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है। एक अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक जिले में 108 पुराने मामलों का निस्तारण कर करीब 15 लाख पेनाल्टी वसूल की गई। एडीएम कोर्ट में 64 मामलों का निस्तारण किया गया। 14 लाख 55 हजार रुपये की पेनाल्टी वसूल की गई। इसी प्रकार एसीजेएम कोर्ट में 44 मामलों का निस्तारण कर संबंधित से 68 हजार तीन सौ रुपये की पेनाल्टी वसूल की गई। जिला अस्पताल के फिजीशियन डाॅ. अशोक यादव ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों में पेट की बीमारियां बढ़ रहीं हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो रोजाना पेट की बीमारी के 50 से 60 मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। जांच में फूड प्वाॅइजनिंग और मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से तबीयत बिगड़ने की पुष्टि होती है।
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