जिले में धान की नर्सरी लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। किसान बीज की खरीदारी करने के साथ ही खेत की तैयारी करने में जुटे हैं। धान की नर्सरी के लिए बृहस्पतिवार को कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा द्वारा किसानों को जानकारी दी जा रही है। किसानों को बीज के शोधन और नर्सरी लगाने के लिए खेत तैयार करने की विधि बताई गई।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. लाल बहादुर गौड़ ने बताया कि धान की नर्सरी तैयार करने वाले किसानों के लिए सबसे पहले बीज शोधन जरूरी है। इसमें 6 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन को 60 लीटर पानी में घोलकर धान की बीज को डुबो देना चाहिए। बाद में 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से कार्बेंडाजिम से शोधित कर नर्सरी लगानी चाहिए। स्ट्रेप्टोसाइक्लिन धान में कंडूवा रोग की रोकथाम करता है। कार्बेंडाजिम बीज को फ्यूजेरियम के प्रकोप से बचाता है। धान की नर्सरी के लिए स्वस्थ बीजों की पहचान होनी जरूरी है। इसके लिए 12 से 14 किलोग्राम प्रति एकड़ बीजों की आवश्यकता होती है। धान की नर्सरी के लिए चुने गए खेत की गहरी जुताई कर कुछ दिनों के लिए छोड़ देना चाहिए। पुन: नर्सरी डालने से पहले खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। फिर उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर अंतिम जुताई कर पाटा चला देना चाहिए। नर्सरी लगाने के एक सप्ताह पहले खेत में पानी भरकर छोड़ देना चाहिए। इससे सभी खरपतवार के बीज बाहर निकल आते हैं। एक सप्ताह बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर छोड़ देना चाहिए। नर्सरी लगाने से एक दिन पहले खेत में पानी भरकर पाटा चलाकर छोड़ देना चाहिए। दूसरे दिन जब मिट्टी थोड़ी कड़ी हो जाए पुन: पानी भरकर बीज को खेत में बिखेर देना चाहिए। धान की नर्सरी एक जून से 15 जून के बीच लगा देनी चाहिए।