विभिन्न जिलों से भेजी गई नौ बोरी से अधिक डाक सामग्री रविवार को जलालगंज रेलवे स्टेशन के समीप बिखरी मिली। इसमें आधार कार्ड, एलआईसी बांड, आवेदन पत्र, सरकारी और गैर सरकारी चिट्ठियां शामिल हैं।
इसके अलावा जिलाधिकारी जौनपुर का भी एक पत्र मिला, जो अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड सुल्तानपुर के पते पर भेजा गया था।
सूचना पर रेलवे के अधिकारियों ने डाक सामग्री को सुरक्षित रख लिया और इसकी जानकारी डाक विभाग के अधिकारियों को दी। डाक अधीक्षक जौनपुर प्रभाकर त्रिपाठी ने पहुंच कर जांच पड़ताल की।
डाक विभाग इसके लिए रेलवे की लापरवाही को जिम्मेदार मान रहा है। वाराणसी-सुल्तानपुर रेल मार्ग पर जलालगंज रेलवे स्टेशन से 50 मीटर दूर रविवार को दोपहर करीब एक बजे किसी राहगीर ने नौ बोरी से अधिक डाक सामग्री बिखरी
पड़ी देखकर इसकी सूचना लोगों को दी। वहां भीड़ लग गई। किसी ने जानकारी रेलवे स्टेशन के अधिकारियों को दी। एएसएम मनोज कुमार ने सफाई कर्मचारी को भेज कर पूरी डाक सामग्री कार्यालय मंगवा ली।
उन्होंने जानकारी डाक विभाग के अधिकारियों को दी। डाक अधीक्षक ने सभी बैगों की जांच की। डाक सामग्री आरएमएस के जरिए भेजी गई थीं।
वाराणसी, मिर्जापुर, मऊ, जौनपुर आदि जिलों से भेजी गई डाक सामग्री में आधार कार्ड, एलआईसी बांड और सरकारी-गैरसरकारी चिट्ठियां, रसीद, पोस्टल आर्डर, नौकरी के लिए अधिशासी अभियंता के नाम आवेदन पत्र भी शामिल हैं।
सभी डाक बैगों पर तीन मार्च 2015 की मुहर लगी है। इससे जाहिर है कि संबंधित जिलों से ये डाक सामग्री तीन मार्च को रवाना की गई थीं। डाक की बोरियां किन परिस्थितियों में वहां पहुंचीं, इसका पता नहीं चल सका है।
डाक अधीक्षक प्रभाकर त्रिपाठी का कहना है कि आरएमएस के जरिए भेजी गई डाक सामग्री निर्धारित पते पर पहुंचाने की जिम्मेदारी रेलवे की होती है।
जलालगंज रेलवे स्टेशन के पास डाक सामग्री किन परिस्थितियों में पहुंची, इसकी जांच की जाएगी।इस संबंध में जलालगंज के स्टेशन अधीक्षक बीबी सिंह का कहना है कि डाक सेवा के लिए ट्रेन में अलग से कोच लगता है।
उसमें सुरक्षा के लिए डाक विभाग के ही कर्मचारी तैनात रहते हैं। सुरक्षा को लेकर रेलवे की कोई जिम्मेदारी नहीं है।