जौनपुर। शरद पूर्णिमा शुक्रवार को श्रद्धा के साथ मनाई गई। पूनम की चांदनी में देर रात आसमान से बरसते अमृत रस को पाने के लिए लोग लालायित रहे। घरों में खीर बनाकर उसे आंगन व छत पर रखा गया। देर रात प्रसाद के तौर पर इसका सेवन किया। स्नान-दान की पूर्णिमा 31 अक्तूबर को है।
आचार्य डॉ. रजनी कांत द्विवेदी ने बताया कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और पूरी रात अमृत की बारिश होती है। इससे पूरा आकाश निर्मल हो जाता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणों से शरीर निरोग्य हो जाता है। शरद पूर्णिमा का समय शुक्ल चतुर्दशी की शाम 5:25 बजे तक है और उसके बाद पूरी रात पूर्णिमा है। इस रात मंद गति से बहने वाली शीतल हवाएं वातावरण को निर्मल बना देती है। शास्त्रों के अनुसार इस रात लक्ष्मी की पूजा कर दरिद्रता से छुटकारा मिलता है। पूर्णिमा का काल शाम से शुरू होने के कारण स्नान-दान की पूर्णिमा 31 अक्तूबर को होगी।