सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महराजगंज में मंगलवार को आयोजित नसबंदी कैंप में लापरवाही उजागर होने की घटना से स्वास्थ्य महकमें में हड़कंप मच गया है। बुधवार को निदेशक परिवार कल्याण लखनऊ डा. सविता दुबे भी जांच के लिए महराजगंज पहुंची। सीडीओ शीतला प्रसाद, संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक वाराणसी और सीएमओ भी जांच के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने कुछ महिलाओं के घर जाकर उनसे बातचीत भी की। सीएचसी के डाक्टर और कर्मचारियों से बंद कमरे में पूछताछ की गई।
निदेशक परिवार कल्याण डा. सविता दुबे शाम को करीब पांच बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महराजगंज पहुंचीं। उन्होंने नसबंदी के लिए आई महिलाओं को फर्श पर लेटाने की बात पर चिकित्सा अधीक्षक और स्वास्थ्य कर्मचारियों से पूछताछ के बाद नाराजगी जताई। आपरेशन कक्ष में सीलन देख फटकारा।
काफी देर तक बंद कमरे में चिकित्सा अधीक्षक और कर्मचारियों से भी बात की।
उनके पहले सीडीओ शीतला प्रसाद ने भी सीएचसी पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की। नसबंदी कैंप में आई बगौझर गांव की आरती और उजाला से भी मिलकर सीडीओ ने उनसे पूछताछ की। संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक और सीएमओ डा. रवींद्र कुमार भी जांच के लिए पहुंचे।
कोल्हुआ गांव की आशा विद्यावती, अमारी की आशा संगिनी रेखा से भी पूछाताछ की गई। अमारी की आशा संगिनी ने बताया कि उनके गांव से रेनू देवी नसबंदी के लिए आई थी। उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया। रात नौ बजे तक आपरेशन नहीं हुआ तो उनके पति आए और बाइक पर बैठाकर उन्हें लेकर चले गए। चिकित्सा अधीक्षक गोपेश सिंह का कहना है कि 16 महिलाओं का पंजीकरण किया गया था। तीन बिना आपरेशन के ही चली गईं बाकी 13 की नसबंदी की गई। अन्य जो महिलाएं आई थी वे उनका आपरेशन नहीं किया जा सकता था। उनमें से कुछ गर्भवती थीं तो कुछ को अन्य कारण से दिक्कत थी जिन्हें वापस कर दिया गया था।