तार और रस्सी के सहारे नौका संचालन। संवाद
राज कुमार यादव खुटहन। जिले में सोमवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो चार दशकों पुराने दौर की याद दिलाती है। गोमती नदी के बलुआ बड़ेरी-खानपुर तथा बीरमपुर-गजेंद्रपुर घाट पर तार के सहारे नाव से नदी पार कर रहे हैं। नाव से ही बाइक, स्कूटी और साइकिल भी नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक ले जा रहे हैं। स्कूली बच्चे भी इसी जोखिम भरे रास्ते से आ जा रहे हैं। दोनों घाटों से प्रतिदिन पांच सौ से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शासनादेश के अनुसार 15 जून को पीपा पुल हटा दिया जाता है। इसके बाद बलुआ बड़ेरी-अंगुली खानपुर और बीरमपुर-गजेंद्रपुर घाट के बीच आवागमन के लिए नाव ही सहारा होता है। पुल हटने से क्षेत्र के करीब दस गांवों के आठ से 10 हजार लोग प्रभावित होते हैं। नौका चालक रामधनी निषाद ने बताया कि तार के सहारे चलने वाली नाव से प्रतिदिन करीब ढाई सौ लोगों को नदी के इस पार से उस पार और उस पार से इस पार ले जाने का काम करते हैं। इसमें बाइक, स्कूटी और साइकिल लेकर आने-जाने वाले लोग भी शामिल हैं। (संवाद)