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सड़कों पर लोग खा रहे हिचकोले, गड्ढामुक्त का आदेश हवाई

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मानसून करीब है लेकिन सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का काम अभी शुरू नहीं हो सका है। विभागीय अधिकारी सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने में हो रही देर की वजह पंचायत चुनाव और कोरोना संक्रमण को मानते हैं। दुर्दशा का दंश झेल रही सड़कों पर चलने वाले लोग हिचकोले खाने को विवश हैं। नेशनल हाइवे से लेकर गांव गिरांव तक की अधिकतर सड़कें गड्ढे में तब्दील हैं। कुछ सड़कें तो ऐसी हैं कि उन पर पैदल चलने में भी परेशानी होती है। आए दिन लोग गड्ढों में फंसकर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
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वाराणसी-लखनऊ हाईवे को फोर लेन बनाने के लिए वाराणसी की सीमा से लेकर सुल्तानपुर जिले की सीमा तक कई जगह बाईपास का निर्माण कर फोर लेन को तो चालू कर दिया गया है, लेकिन पुरानी सड़क को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। पुरानी सड़क पर मुरादगंज, कलीचाबाद, अलीगंज, शंभूगंज, शिवगुलामगंज, बक्शा, नौपेड़वा, धनियामऊं, सरोखनपुर, बदलापुर तक अनगिनत गड्ढे हैं। पिछले दिनों हुई बारिश का पानी अभी भी कई जगह सड़क पर बने गड्ढों में भरा हुआ है। इसके अलावा मछलीशहर से जंघई, गोधना से निगोह मार्ग, जंघई से जरौना, मुंगराबादशाहपुर से जंघई, बदलापुर से सराय त्रिलोकी मार्ग समेत जिले की सभी तहसीलों में प्रमुख मार्गों की दशा खराब है। इनमें से कई सड़कें एक साल या इससे भी अधिक समय से गड्ढे में तब्दील हैं। खुदौली से तियरा के बीच आठ किलोमीटर तक सड़क एक साल से गड्ढे में तब्दील है। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राधाकृष्ण का कहना है कि पंचायत चुनाव और कोरोना संक्रमण के चलते मार्च से मई महीने तक सड़कों की मरम्मत का काम ठप रहा है। इधर, एक सप्ताह तक बारिश के चलते भी काम प्रभावित हुआ है। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए कार्ययोजना बन चुकी है। सरकार की तरफ से कुछ बजट भी मिला है। कोशिश है कि मानसून आने से पहले सड़कों को गड्ढा मुक्त कर लिया जाएगा।
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