जौनपुर। जिले में भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर चली जांच में पकड़े गए 4.50 करोड़ के फर्जीवाड़ा से दो साल पहले भी 12 काश्तकारों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 58 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। भ्रष्टाचार का यह खेल जो अब पकड़ा गया वह काफी समय से चल रहा था।
वर्तमान समय में जो गड़बड़ी पकड़ी गई उसमें अधिकतर भुगतान वर्ष 2023-24 में किए गए। वहीं दो साल पहले भी 12 काश्तकारों में 58 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याप्ति (काला) कार्यालय में फोरलेन में जमीन जाने वाले काश्तकारों के मुआवजे में फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। डीएम ने मामले की जांच की तो पहले दिन कार्यालय में चार काश्तकारों की फाइलें फर्जी मिलीं, इन्हें ढाई करोड़ का मुआवजा दिया गया। इसमें तहसीलों से आए बगैर यहीं पर फाइलें तैयार की जाती हैं। साथ ही लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम का फर्जी हस्ताक्षर व मुहर करके गलत तरीके से काश्तकार का नया खाता खोलवाकर भुगतान कराया जा रहा था। इसमें सीडीओ साईं तेजा सीलम की अध्यक्षता में जांच कराई गई। इसमें चार तहसील जौनपुर, मड़ियाहूं, मछलीशहर और बदलापुर में काश्तकारों के मुआवजे के मामले की जांच की गई तो कुल 14 पंचायतों में 46 काश्तकारों में कुल 4.50 करोड़ का भुगतान गलत तरीके से किया गया। जांच में पता चला कि वर्ष 2021-22 में बदलापुर के मिरशादपुर गांव के चार काश्तकारों को आठ लाख रुपये और वर्ष 2022-23 में बदलापुर के आठ काश्तकारों में 50 लाख का भुगतान किया गया। इस तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुल 58 लाख का भुगतान किया गया। ऐसे में इन काश्तकारों की पहचान कर वसूली प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
.....................................................
वर्जन ...
सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याप्ति (काला) कार्यालय में हुई गड़बड़ी की जांच में पाया गया कि दो साल पहले भी फर्जी तरीके से 58 लाख का भुगतान किया गया। यह मुआवजा 12 काश्तकारों में बांटा गया। इनकी पहचान करके वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- साईं तेजा सीलम, मुख्य विकास अधिकारी।