जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों में तैनात 22 शिक्षकों का पैन कार्ड बदल गया। जिन शिक्षकों के वेतन संबंधित अभिलेखों में चार-पांच साल पहले पैन कार्ड संख्या कुछ और थी अब उन्हीं अभिलेखों में उनके पैन कार्ड की संख्या बदल गई है। मई महीने के वेतन संबंधित अभिलेखों की जांच में शासन स्तर से उजागर हुई इस खामी की जांच चल रही है। हालांकि वित्त एवं लेखाधिकारी की अभीतक की जांच में पाया गया है कि अधिकतर मामलों में कंप्यूटर आपरेटर की गलती से पैनकार्ड का गलत नंबर चढ़ गया।
प्रदेश में शिक्षकों के वेतन संबंधित अभिलेखों की जांच हो रही है। वित्त नियंत्रक बेसिक प्रयागराज ने मई महीने में वेतन भुगतान की रिपोर्ट 21 जून को शासन को सौपी थी। जिसमें तमाम खामियां उजागर हुई है। एक ही नाम और पैन नंबर एक से अधिक जिले की फाइलों में हैं तो कइयों के पैनकार्ड चार साल पहले कुछ थे और अब कुछ और हो गए हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इसे संदिग्ध और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा है कि ऐसे मामले जांच में लापरवाही को साबित कर रहे हैं। उनके निर्देश पर शिक्षकों के वेतन संबंधित अभिलेखों की जांच कर रहे वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा नंद कुमार कुरील ने बताया कि अधिकतर मामलों की जांच पूरी कर ली गई है। जांच में पता चला है कि पूर्व में जब वेतन बिल के साथ शिक्षकों का पैन कार्ड भी कंप्यूटर में फीड करने का निर्देश हुआ तो प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटरों ने तमाम शिक्षकों का पैन नंबर गलत फीड कर दिया था। उसी गलत पैन नंबर उन्हें वेतन भी जारी होता रहा। बाद में जब शिक्षकों ने कंप्यूटर में अपना पैन कार्ड सही करा लिया तो पुराने रिकार्ड से मिलान करने पर शिक्षकों के पैन कार्ड में परिवर्तन दिखने लगा। जबकि चार मामले ऐसे मिले हैं जो वर्ष 2016 में आजमगढ़ और चंदौली से तबादला कराकर जिले में अलग अलग विद्यालयों में ज्वाइन कर लिया। उनका वेतन दूसरे जिले से अवरुद्ध हो गया लेकिन कंप्यूटर में उनका डाटा डिलीट नहीं किया गया। इसनाते वहां के वेतन संबंधित अभिलेखों में भी उन शिक्षकों का नाम और पैन कार्ड अभी भी दिख रहा है। इन मामलों की जांच करा ली गई है। उनके पुराने बैंक खाते में सितंबर 2016 के बाद से वेतन की कोई राशि नहीं गई है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।