जिला अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए पर्ची लिख रहे हैं। आरोप तो यह भी है कि अस्पताल में कुछ डॉक्टरों की बाहर के मेडिकल स्टोर संचालकों से सेटिंग है, जिससे वे बाहर की दवाएं लिखते हैं। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में बाहर की दवाएं लिखते दो डॉक्टर पकड़े जाने पर मामले ने तूल पकड़ लिया।
घटना संज्ञान में आने के बाद खुद सीएमएस डॉ. एके शर्मा ने संबंधित मरीज की पर्ची लेकर डॉक्टर के पास पहुंचकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बाहर से दवा खरीदने के लिए पर्ची लिखने वाले दोनों डॉक्टरों के निलंबन के लिए डीएम और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखेंगे। अस्पताल में 66 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, फिर भी कुछ डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 500-700 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों को उम्मीद होती है कि एक रुपये की पर्ची पर उनका इलाज हो जाएगा। लेकिन, यहां आने के बाद उन्हें पता चलता है कि बाहर की दुकानों से महंगी दवाएं लेनी पड़ेंगी। हालांकि सीएमएस डॉ. एके शर्मा का दावा है कि अस्पताल में मरीजों के लिए 66 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी दवाओं की खरीद की जाती है। हालांकि यह कोई नहीं बात नहीं है। इस तरह के दावे के बाद भी डॉक्टर बाहर से दवाएं लिखते हैं और उनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जिसके पीछे के कारण को आसानी से समझा जा सकता है। उधर, दूरदराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अस्पताल में दवा के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्हें सादे कागज पर दवा का नाम लिखकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जा रहा है। स्पष्ट है कि कमीशन के नाम पर यह खुला खेल चल रहा है। सीएमएस द्वारा कार्रवाई की चेतावनी के बाद एक और महिला सामने आई, जिसने अपना नाम शकुंतला देवी बताया। साथ ही आरोप लगाया कि साहब एक हजार रुपये की दवा बाहर से खरीदकर लाने के लिए विवश हुईं। उनका कहना था कि अस्पताल से केवल दो दवाएं ही मिली हैं। उधर, जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक करमवीर का कहना है कि यहां आने वाले मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखी जाती हैं। जिसके कारण अधिकांश मरीज बाहर से दवाएं खरीदते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ है कि जब मरीज जन औषधि केंद्र की दवाएं खरीद कर ले जाते हैं तो डॉक्टर उसे वापस करने के लिए दबाव बनाते हैं। मरीजों का बताया जाता है कि जन औषधि केंद्र की दवाएं फायदा नहीं करती हैं।