जौनपुर। सड़क दुर्घटना में मृत कांस्टेबल काशीनाथ राय को 32 वर्ष बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं मिली। इस मामले में सड़क दुर्घटना न्यायालय के जज भूदेव गौतम ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार को आदेश दिया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन से बजट उपलब्ध करा कर क्षतिपूर्ति की धनराशि जमा कराएं।
सड़क दुर्घटना न्यायालय ने आदेश में लिखा है कि जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा क्षतिपूर्ति की धनराशि न्यायालय में जमा नहीं कराई जा रही है। रिपोर्ट में बजट आवंटित न होने की आख्या दी जाती है। दुर्घटना के लगभग 32 वर्ष बाद भी शासन की उपेक्षा के कारण मृतक के परिजन क्षतिपूर्ति से वंचित हैं जो कि संपूर्ण व्यवस्था पर एक प्रश्न चिन्ह है।
बता दें कि श्रीकृष्ण राय ने कोर्ट में भारत संघ, उत्तर प्रदेश राज्य व पुलिस अधीक्षक के खिलाफ याचिका दाखिल किया था कि उसके पिता काशीनाथ कांस्टेबल थे। केराकत तहसील में खजाने में तैनात थे। फोर्स की कमी के कारण 1जनवरी 1992 को क्षेत्र में दबिश में गए थे।वापस आते समय 5:30 बजे शाम पुलिस जीप की रेलवे क्राॅसिंग पर रेलगाड़ी से टक्कर हो गई। पिता को गंभीर चोटें आईं। हादसे के दो दिन बाद इलाज के दौरान बीएचयू में उनकी मौत हो गई।
उनका वेतन 4400 रुपये था। कोर्ट ने गवाहों के बयान एवं बहस के बाद 16 मई 2008 को उप्र शासन एवं पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि याची को 4.62 लाख रुपये क्षतिपूर्ति 9 फीसद ब्याज की दर से अदा करें। विपक्षिगण उक्त आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 21 सितंबर 2023 को विपक्षी द्वारा दाखिल किया गया अपील निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने पुनः आरसी जारी करते हुए जिलाधिकारी को आदेश दिया कि विपक्षी पुलिस अधीक्षक से मय ब्याज 9.41 रुपये की वसूली कराकर कोर्ट को अवगत कराएं लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को आदेश जारी किया है।