जौनपुर। उपचार में लापरवाही से महिला की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश राजनेश कुमार ने सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड के माध्यम से मामले की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश सीजेएम को दिया है।
बक्शा थाना क्षेत्र के मझौली निवासी राजेश मौर्या ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था कि 15 नवंबर 2017 को उसकी मां यशोदा को पेट में दर्द व बुखार की शिकायत थी। उसे शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने 15 से 18 नवंबर तक उसकी मां का इलाज किया। उसके बाद वाराणसी नोवा हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दिया, जहां डेंगू की पुष्टि हुई। 21 को मां की मृत्यु हो गई। मां के इलाज के संबंध में शक होने पर यहां के नर्सिंग होम के डॉक्टर रजनीश व डॉ अरशद से मेडिकल संबंधी प्रपत्र मांगा तो वह हीलाहवाली करने लगे। उपचार में लापरवाही से मां की मौत हो गई। मामले में सीजेएम ने सीएमओ को जांच का आदेश दिया। सीएमओ ने रिपोर्ट दी कि इलाज में लापरवाही नहीं हुई जिस पर सीजेएम ने वादी का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। सीजेएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ उसने सेशन कोर्ट में डॉक्टरों के खिलाफ निगरानी प्रस्तुत की। सेशन कोर्ट ने बुधवार को सीजेएम को आदेश दिया कि सीएमओ की ओर से गठित चिकित्सीय बोर्ड के माध्यम से जांच आख्या मंगाकर कर प्रार्थना पत्र पर विधि सम्मत आदेश करें।
बदलापुर एसओ समेत छह पुलिसकर्मियों पर वाद दर्ज
जौनपुर। हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेश कुमार निवासी ग्राम सुल्तानपुर थाना बदलापुर की शिकायत पर सीजेएम ने बदलापुर के तत्कालीन एसओ समेत छह पुलिसकर्मियों पर वाद दर्ज किया है। सभी पर मिथ्या साक्ष्य साक्ष्य गढ़ने, कूटरचना, जालसाजी आदि का आरोप है। अधिवक्ता का कहना है कि पुलिस ने उसके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों से मिलकर 29 मार्च 2019 को बदलापुर पुलिस उसे उसके घर से गिरफ्तार कर थाने पर ले गई। 30 मार्च की रात गांजा व हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में फर्जी गिरफ्तारी दिखाते हुए चालान कर दिया, जबकि वह उस समय लॉकअप में बंद था। गिरफ्तारी को लेकर उसने पुलिस के उच्चाधिकारियों को दरखास्त दिया जिससे नाराज पुलिसकर्मी अब उसका एनकाउंटर करने की फिराक में है।