जौनपुर। अगस्त का तीसरा सप्ताह बीतने को है लेकिन इतनी बारिश भी नहीं हुई कि धरती तर हो सके। कृषि विभाग के मुताबिक अगस्त में अब तक की सबसे कम बारिश हुई है। औसत से 20 फीसदी ही वर्षा हुई है। जून और जुलाई में वर्षा के आंकड़े औसत से काफी कम है। इसका असर खेती पर तो पड़ा ही है, तालाब भी सूखे हैं। भूजल स्तर गिरने की भी आशंका है।
जिले के अधिकांश क्षेत्रों में कृषि वर्षा पर आधारित है। इस वर्ष अधिक गर्मी पड़ने से लोगों को यह उम्मीद थी कि बारिश भी अच्छी होगी लेकिन बरसात ने निराश ही किया। आषाढ़ का महीना बिना बारिश के बीत गया। सावन में भी एक या दो दिन बारिश हुई। भादो में भी अब तक ठीक से वर्षा नहीं हुई है। बारिश नहीं होने से तालाब सूखे हुए हैं। धान की रोपाई भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भूजल स्तर भी घटने की आशंका पैदा हो गई है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सबसे कम वर्षा जौनपुर में हुई है। जून में 22.55 और अगस्त में 60.37 मिली मीटर वर्षा रिकार्ड की गई है। जून से अगस्त में अब तक सामान्य वर्षा का आंकड़ा 534.64 मिमी का है लेकिन इस बार 308.72 मिमी ही वर्षा हुई है। यह 57.74 प्रतिशत है। इसी अवधि में पिछले वर्ष 398.95 मिमी (76.62 प्रतिशत) बारिश हुई थी। इस साल बारिश की हालत आंकड़ों में भले ही संतोषजनक दिखाई दे लेकिन एक समान और लगातार बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसी स्थिति हो गई है।
कम बारिश, फिर भी रोपाई का लक्ष्य पूरा
जुलाई-अगस्त का महीने में भले ही कम बारिश हुई हो लेकिन कृषि विभाग के मुताबिक धान की रोपाई का लक्ष्य पूरा हो गया है। कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर नहीं पड़ा है। धान की खेती के लिए 226318 हेक्टेयर का लक्ष्य था, जिसमें 212705 हेक्टेयर में रोपाई हो चुकी है। यह करीब 94 प्रतिशत है। विभागीय अफसरों के मुताबिक सामान्य वर्षा से कम बारिश होने और विलंब से रोपाई के कारण खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
जिले में इस बार सामान्य से कम वर्षा हुई है। अब तक 534.64 मिमी वर्षा होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 57.74 प्रतिशत ही वर्षा रिकार्ड की गई। किसानों ने धान की रोपाई विलंब से की है। इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है। अच्छी पैदावार के लिए खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। -केके सिंह, जिला कृषि अधिकारी।