सरकारी सस्ते गल्ले के दूकानदारों (कोटेदार) की हड़ताल के चलते इस बार गरीबों की दिवाली फीकी रहेगी। केरोसिन के आवंटन में कमी करने समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलित कोटेदारों ने इस महीने अनाज का उठान नहीं किया। दीपावली से पहले कोटे की दूकान से चीनी और राशन मिलने की आस लगाए गरीब परिवार के लोग मायूस हैं।
45 लाख की आबादी वाले इस जिले में 10 लाख राशनकार्ड धारक हैं। पात्र गृहस्थी वाले राशन कार्ड धारकों को सरकारी दूकान से प्रति यूनिट दो रुपये प्रति किलो की दर से दो किलो गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो की दर से तीन किलो चावल मिलता है। बाजार में चीनी चालीस रुपये किलो की दर से बिक रही है। जबकि सरकारी सस्ते गल्ले की दूकानों से गरीबों को 18 रुपये किलो की दर से चीनी मिल जाती है।
दीपावली को लेकर जहां लोग घरों की साफ-सफाई और अन्य तैयारी में लगे हैं वहीं गरीब परिवार के लोग दीपावली से पहले चीनी और राशन न मिलने से परेशान हैं। उधर कोटेदारों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगे जबतक पूरी नहीं की जाएंगी तबतक वे अनाज का उठान नहीं करेंगे।
अनाज का उठान हर महीने में 21 तारीख तक हो जाता है। तारीख बीत गई लेकिन कोटेदारों ने अनाज का उठान नहीं किया। बक्शा के गढ़ा गांव निवासी रामलोचन गौतम अंत्योदय कार्ड धारक हैं। वह कहते हैं कि सरकारी से मिलने वाले अनाज से ही परिवार का गुजारा होता है। इस महीने दीपावली से पहले राशन मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। इसी गांव के मुस्तफा कहते हैं कि बाजार में चीनी 40 रुपये किलो मिल रही है। ऐसे में उनकी हैसियत बाजार से चीनी खरीदने की नहीं है।