बक्शा। स्थानीय थाना क्षेत्र के नौपेड़वा बाजार निवासी एक महिला ने बक्शा थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसपी, आईजी और डीआईजी से न्याय की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि पुलिस ने होली के दिन उसे और उसके पति को थाने उठा ले गई। उसकी लाई-चिवड़े की दुकान से सारा सामान फेंक दिया और कपड़े की दुकान खोलवा दी।
नौपेड़वा बाजार निवासी आरती गुप्ता ने आईजी को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसके पति प्रेमचंद और राजेंद्र प्रसाद के बीच मकान का मुकदमा चल रहा है। वह दुकान में लाई-चिवड़ा बेचकर जीविका चलाती है। मंगलवार को भोर में चार बजे पुलिस ने उसे और उसके पति मारते-पीटते गाड़ी में बैठा लिया। उनके साथ कोई महिला पुलिस भी नहीं थी। इस दौरान उसके कपड़े भी फट गए। दुकान में रखी 20 बोरी लाई, 10 बोरा चिवड़ा, नमकीन , गट्टा, बक्से में रखे गहने और नकदी लूट लिए। बाद में उसकी दुकान में कपड़े दुकान खोलवा दी गई। थाने पर जब उसके जेठ जेठानी आए तो उन्हें भी बंद कर दिया गया। पति को हवालात में रखा गया और उसे थानेदार के आवास पर बैठाया गया। शाम को पुलिस ने उसे छोड़ दिया। उसने पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। सीओ सदर नृृपेंद्र का कहना है कि भूमि विवाद में दोनों पक्षों का पुलिस ने चालान किया था। महिला की शिकायत पर जांच की जा रही है, जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम के निर्देश पर गुरुवार को राजस्व विभाग की टीम ने विवादित मकान का निरीक्षण किया। पीड़ित का कहना है कि जब कोर्ट में मुकदमा चल रहा है तो फैसला आए बिना पुलिस कैसे जबरन मकान खाली करा सकती है। थानाध्यक्ष बक्शा शशिचंद्र चौधरी का कहना है कि दोनों पक्षों में विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई थी। शांति भंग में दोनों पक्षों का चालान किया गया है। आरोप बेबुनियाद हैं।