पुराने साथी एक मंच पर जुटे तो पुरानी यादें ताजा हो उठीं। हर किसी ने पुराने साथियों से मिलकर उन्हें गले लगा लिया। मौका था पुरातन छात्र समागम का। राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन 1971 में स्नातक की पढ़ाई करने वाले प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री जगदीश नारायण राय ने दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। गरिमा पांडेय ने सरस्वती वंदना और महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय ने कहा कि पुरातन छात्र समागम से अपने शिक्षा काल की यादें ताजा हो गईं। 1984 में इसी महाविद्यालय से बीएड की डिग्री हासिल करने वाले पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए नैतिक शिक्षा की अहमियत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एसपी ओझा ने कहा कि महाविद्यालय के विकास में पुरातन छात्रों की अहम भूमिका होती है।
पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा कि इस विद्यालय की स्थापना अंग्रेजों के शासन काल में मिशनरी स्कूल के रूप में विशप मिशेल ने की थी। ऐतिहासिक धरोहर अटाला मस्जिद और शाही किले के मध्य स्थित इस विद्यालय को 1959 में डिग्री कालेज के रूप में स्व. राजा यादवेंद्र दत्त दुबे ने स्थापित किया था। महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर चुके छात्र उच्च पदों पर आसीन हैं।
इस अवसर पर पुरातन छात्र परिषद के महामंत्री गौतम गुप्ता, उपाध्यक्ष राधेकृष्ण ओझा, मंत्री विक्रम सिंह, मधुकर तिवारी, संजय पांडेय, पूनम मौर्या, रामचंदर यादव, डा. अवधेश द्विवेदी, डा. मयानंद उपाध्याय समेत महाविद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे। संचालन डा. विष्णु चन्द्र त्रिपाठी ने किया। डा. अभय प्रताप सिंह ने आभार व्यक्त किया।