जौनपुर। जनता की समस्या से अफसरों को कोई लेनादेना नहीं है। जन सुनवाई पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के समाधान के मामले में जिले के 59 वें स्थान पर आने से इस बात का खुलासा हो गया है कि तहसील, जिलाधिकारी और एसपी के कार्यालय तक शिकायत करने वालों के साथ कागजों पर ही न्याय किया जा रहा है। इसे मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद जिले के अफसरों में खलबली मच गई है।
जन शिकायतों के निस्तारण में हो रहे कागजी खेल को मुख्यमंत्री ने गंभीर से लिया है। शिकायतों का कागज पर निस्तारण का काम सबसे ज्यादा पुलिस महकमे में हो रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई है। पुलिस के पास 1076 शिकायतें आई थीं और इनके निस्तारण की शासन को रिपोर्ट भेज दी गई। मगर फीडबैक लेने पर पता चला कि समस्या जस की तस है। इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम (आईजीआरएस) पर आने वाली शिकायतों की छह अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न मामलों से जुड़ी 24 हजार 158 शिकायतें आई थीं। इनमें से 22724 शिकायतों का निस्तारण करने का दावा प्रशासन ने किया है। महज 1434 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से 230 शिकायतें तो निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी निस्तारित नहीं की जा सकी हैं।
मुख्यमंत्री संदर्भ में कुल 917 शिकायतें आई जिसमें से 820 का निस्तारण किया गया जबकि 97 शिकायतें लंबित हैं। जिलाधिकारी के पोर्टल पर की गई 6511 में से 5760 शिकायतों का निस्तारण किया गया है। 751 मामले लंबित हैं। संपूर्ण समाधान दिवस के 7183 में से 6994 मामले निस्तारित करने का दावा प्रशासन का का है। इसमें महज 189 मामले ही ऐसे बताए गए हैं, जिनमें कोई फैसला नहीं हो सका है। इसी तरह लोकवाणी पर आई 314 में से 285 शिकायतों का समाधान प्रशासन ने किया है। यहां केवल 29 मामलों में कोई फैसला नहीं हो सका है।
भारत सरकार पीजी पोर्टल संदर्भ में कुल 1461 शिकायतें आई जिसमें से 1337 का निस्तारण कर दिया गया। जबकि 134 शिकायतेें अभी भी लंबित हैं। आनलाइन प्राप्त संदर्भ में 342 शिकायतें आई जिसमें से 336 का निस्तारण किया गया। 6 शिकायतें लंबित हैं। शासन/ राजस्व परिषद/निदेशालय संदर्भ में 4215 शिकायतें आई जिसमें से 4150 का निस्तारण कर दिया गया। 65 शिकायतें लंबित हैं। उप मुख्यमंत्री/मंत्री संदर्भ में 87 में से सभी का निस्तारण कर दिया गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन संदर्भ में 3058 शिकायतें आई जिसमें से 2896 का निस्तारण किया गया और 162 लंबित हैं।
गायब हो जाती हैं पत्रावलियां
जौनपुर। संपूर्ण समाधान दिवस, जनसुनवाई हो एवं अन्य शिकायतों का ही मामला क्यों न हो, यहां तो पत्रावलियां ही गायब हो जाती है। आकंड़े भी इसके गवाह है। संपूर्ण समाधान दिवस पर एक ही फरियादी बार- बार दौड़ता है कागजों में उसके मामले का निस्तारण दिखा दिया जाता है लेकिन वास्तव में होता नहीं है। भूमि संबंधी विवादों को लेकर सबसे बड़ा संकट जिले में है। स्थिति यह है कि जनवरी से अगस्त माह तक 7449 शिकायतें संपूर्ण समाधान दिवस में आए जिसमें 628 का ही निस्तारण हो सका। इसमें 200 शिकायतों की पत्रावलियां गायब हो गई हैं।
जुलाई 2014 से लगातार कर रहे शिकायत
जौनपुर। बदलापुर क्षेत्र के सरोखनपुर निवासी महेन्द्र कुमार शर्मा ने अराजी नंबर 1687 में 18 डिसमिल तालाब तथा 1688/62 में बंजर जमीन पर किए गये कब्जे को खाली कराने के लिए प्रशासन को कई शिकायती पत्र जुलाई 14 से अब तक दे चुके हैं लेकिन अभीतक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।