जिला अस्पताल में अगर कभी आग लगी तो भुवनेश्वर जैसे हालात पैदा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर के मध्य में स्थित अस्पताल में अगलगी जैसी घटना से निबटने के कोई ठोस इंतजाम नहीं है। अस्पताल में न तो जरूरत के मुताबिक सीज फायर है और न ही कोई अन्य संसाधन।
भुवनेश्वर के अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद अमर उजाला ने मंगलवार को जिला अस्पताल की पड़ताल की।सर्जिकल और मेडिकल वार्ड को छोड़ अस्पताल के किसी भी वार्ड में सीज फायर नहीं दिखा। जबकि निर्देश है कि सभी वार्डों, हाल और गैलरी में भी सीज फायर रखा जाना चाहिए।
और तो और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में सीज फायर के इस्तेमाल के लिए कोई ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है। नाम न छापने की शर्त पर जिला अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि आपात स्थिति में सीज फायर का इस्तेमाल कैसे करेंगे इसके लिए उन्हें कभी कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
पहली मंजिल से नीचे उतरने के लिए दो सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है। लेकिन गैलरी में कहीं सीढ़ी का इंडीकेटर नहीं लगा है जिससे अनजान व्यक्ति को आपात स्थिति में सीढ़ियों को खोजना होगा। यह स्थिति तब है जब एक माह पहले आपरेशन थियेटर में आग लगने की घटना हो चुकी है।
बावजूद अस्पताल प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। जिला अस्पताल से फायर स्टेशन की की दूरी वैसे तो महज तीन किलोमीटर ही है, लेकिन बड़े अग्नि शमन वाहन को अस्पताल पहुंचने के लिए पांच से सात किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना होगा।
भंडारी रेलवे स्टेशन के दोनों छोर से रेलवे लाइन के नीचे से सड़क निकल कर फायर स्टेशन जाती है लेकिन पुल की उंचाई इतनी कम है कि बड़ी गाड़ी इसके नीचे से नहीं निकल सकती। लिहाजा फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियों को सिपाह से शाही किला होकर या फिर जेसीज चौराहे से ओलंद होकर अस्पताल पहुंचने होगा।
इतना सफर तय कने में फायर ब्रिगेड पांच से साथ किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर जिला अस्पताल पहुंचना होगा। शहर में जाम लगा रहा तो समस्या और भी गंभीर हो सकती है।फायर सर्विस के अधिकारियों की मानें तो जिला अस्पताल समेत सभी निजी अस्पताल संचालकों को भी आग लगने जैसी संभावित घटना से निबटने के लिए सभी जरूरी एहतियात के बारे में बता दिया गया है।