इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12 रबीउलअव्वल को नबीए करीम सल्ललाहु अलैहे वसल्लम की पैदाइश हुई। इस दिन मुसलमान बंधु बड़े धूमधाम से उनकी पैदाइश को मनाते हैं। सुबह से ही लोग तैयारी में जुट गए। घरों में विविध पकवान पकाए गए।
मगरिब की नमाज के बाद मछलीशहर पड़ाव स्थित शाही ईदगाह से जुलूस निकला। मरकजी सीरत कमेटी के अध्यक्ष हाजी अफजाल अहमद और जाफर अहमद जाफरी ने झंडी दिखाकर जुलूस को रवाना किया। इसके बाद जुलूस शहर में 32 अंजुमनों और 16 फने सिपहगिरी के अखाड़ों के साथ निकला।
जुलूस शाही ईदगाह से जहांगीराबाद, ओलंदगंज, शाहीपुल, चहारसू चौराहा, कोतवाली चौराहा होते हुए अटाला मस्जिद पहुंच कर खत्म हुआ। नबीए करीम की वेलादत के मौके पर पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया। मस्जिदों की रौनक देखते ही बनती थी। खासकर अटाला मस्जिद को भव्य रूप से सजाया गया था। शाही पुल को रंग-बिरंगे झालरों से सजाया गया था।
बिजली नहीं रहने की स्थिति में जेनरेटर की भी व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा अलग-अलग कमेटियों ने भी अपनी सजावट की थी। जहांगीराबाद, सरायपोख्ता, कसेरी बाजार, चहारसू चौराहा, हरलालका रोड, कोतवाली चौराहा, अटाला मस्जिद पर भी कमेटियों ने अपनी अलग सजावट और स्टेज लगाया था। कोतवाली चौराहे पर काबा का रूप भी दिया गया है।
हरलालका रोड स्थित स्टेज पर तबर्रुख की व्यवस्था की गई थी। बलुआघाट की अंजुमन रसूलियाए मधारेटोला की अंजुमन सुबहानियाए सब्जीमंडी की अंजुमन फरूकिया, सिपाह की अंजुमन मोहम्मदिया, मीरमस्त की अंजुमन रशीदिया 922, कोरापट्टी का अंजुमन खालिदिया, सब्जी बाजार की अंजुमन रहमान ए खुर्द, मुजाहिद ए इस्लाम समेत अंजुमनों ने नातख्वानी की।
अंजुमन के साथ चल रहे लोगों ने नातख्वानी को दोहराया। हाथी, घोड़ा और ऊंट के साथ निकले सिपाह की अंजुमन और अखाड़ा मोहम्मदिया के जुलूस में काफी लोग हौसला आफजाई करते दिखे। वहीं फनेे सिपहगिरी के अखाड़ा शफीक उस्ताद, अखाड़ा सलीम उस्ताद, अखाड़ा रज्जब उस्ताद समेत अखाड़ों ने पूरे रास्ते तलवारबाजी, बल्लम, आग का खेल आदि का प्रदर्शन किया।