सिकरारा। भूमि और पुलिस से जुड़े मामलों के समाधान की आस लेकर आए फरियादियों को शनिवार को थानों से मायूस लौटना पड़ा। सुनवाई न होने से वह घंटों इंतजार के बाद लौट गए। सुनवाई के लिए राजस्व और पुलिस विभाग के स्थानीय कर्मचारी तो मौजूद रहे, लेकिन कोई सक्षम अधिकारी नहीं पहुंचा।
कोरोना संक्रमण के बाद से ही शासन ने माह के तीसरे मंगलवार को लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवस और शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से भूमि और पुलिस से जुड़े मामलों में तेजी से वृद्धि हुई थी। इन विवादों में कई बड़ी घटनाएं भी हुई। अनलॉक के बाद शासन के निर्देश पर मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ। शनिवार को थाना समाधान दिवस पर सुनवाई की उम्मीद में तमाम लोग लंबी दूरी तय कर थाने पर गए। राजस्व व पुलिस के कर्मचारी भी मौजूद रहे। काफी देर तक सभी सक्षम अधिकारियों के आने की बाट जोहते रहे। लगभग साढ़े 11 बजे एसओ के पूछने पर मड़ियाहूं तहसील के एक लेखपाल ने बताया कि आज का समाधान दिवस निरस्त हो गया है। उसके व्हाट्सएप ग्रुप पर तहसीलदार ने संदेश दिया है। यह संदेश मिलते ही वहां उपस्थित 100 से अधिक फरियादी मायूस होकर लौट लगे। उन्हें आज निरस्त किए गए समाधान दिवस का दर्द और भी पीड़ा दे रहा था, क्योंकि गत बुधवार को आयोजित विशेष थाना दिवस को भी अंतिम समय में निरस्त कर दिया गया था। लोगों में अधिकारियों के इस उपेक्षात्मक रवैए पर असंतोष रहा। इस संबंध में थाना प्रभारी अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि गत बुधवार को ही शनिवार को आयोजित होने वाले समाधान दिवस की सूचना दे दी गई थी। इसलिए उस दिन के भी आवेदक आज आए थे। अधिकतर मामले जमीन संबंधी विवाद के हैं,जो बिना राजस्व विभाग के हस्तक्षेप के निस्तारित नहीं हो सकते। फिर भी फरियादियों के आवेदन को समाधान दिवस पंजिका पर दर्ज कर लिया गया है। जो भी संबंधित कर्मचारी थाने पर उपलब्ध हैं, उन्हें उचित कार्रवाई के लिए आवेदन पत्र सौंप दिया गया है।