रिमांड में परिवर्तन की मांग खारिज
डीएनए टेस्ट कराने के मामले में 27 को होगी सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। अपहरण और यौन शोषण में जेल भजी गई महिला के मामले में स्पेशल न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह गौतम के समझ वादी पक्ष ने प्रार्थना पत्र देकर मांग किया था कि नाबालिक बच्चे का अपरहण कर यौन शोषण किया है। जो लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अधीन आता है इसलिए आरोपी महिला को जिला कारागार से तलब कर रिमांड में परिवर्तन किया जाय। जिसे बुधवार को न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। नाबालिग लड़के का आरोपी महिला ने भी डीएनए टेस्ट की मांग की है। इस पर सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तिथि नियत की गई है।
मामले में पिता का आरोप है कि उसके नाबालिक बच्चे का अपहरण कर यौन शोषण किया। दूसरी तरफ महिला का आरोप है कि वादी पक्ष के लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया जिससे वह गर्भवती हो गई। महाराजगंज थाना क्षेत्र निवासी नाबालिग लड़के का अपहरण कर यौन शोषण करने की आरोपी विवाहिता महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था । जहां उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी महिला ने आरोप लगाया कि वादी पक्ष के लोगों द्वारा बार-बार उसके साथ दुष्कर्म करने के कारण वह गर्भवती हो गई। उसने अपने पेट में पल रहे बच्चे का और वादी पक्ष के लोगों का डीएनए टेस्ट कराने के लिए कोर्ट प्रार्थना पत्र देकर मांग किया।
इनसेट
यह है मामला
महाराजगंज थाना क्षेत्र निवासी नाबालिक लड़के के पिता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर प्राथमिकी दर्ज कराया कि महिला आरोपी एवं अन्य आरोपियों ने साजिश के तहत उसके नाबालिग पुत्र का 14 जनवरी 2019 को अपहरण किया। सोची समझी साजिश के तहत आरोपी शादी शुदा महिला से उसके बेटे की शादी करा दिया। आरोपी महिला उसके लड़के का यौन शोषण कर रही है। आरोपी महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया वहां उसने बताया कि वादी पक्ष के लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया जिससे वह गर्भवती हो गई।