क्षमता से अधिक बंदियाें के होने से जेल की व्यवस्था चरमरा गई है। 350 बंदियों की तुलना में नौ सौ से अधिक जेल बंद हैं। उधर, नई जेल के लिए दो वर्ष से 60 एकड़ जमीन की तलाश प्रशासन नही कर सका है। जमीन मिलती तो एक हजार बंदियों की क्षमता का नया कारागार अधिकारियों का आवास, बंदी रक्षकों का आवास और बैरक का निर्माण होता। लेकिन ऐसा संभव नही हो पा रहा है।
जौनपुर की जेल शहर के बीचों बीच में स्थित है। लोग अपने तीन मंजिलें बिल्डिंगों से बंदियों को निहारते हैं। जेल में बंद बंदियों पर इन बिल्डिंगों से कभी भी हमला भी किया जा सकता है। जेल में कहने के लिए तो नौ बैरकें हैं, लेकिन सभी जर्जर हो गई हैं। रात में सोने के दौरान बंदियों के ऊपर प्लास्टर का चप्पड़ गिरता है। यही नही जो बंदी रक्षकों के आवास हैं उनमें जानवरों ने अपना ठिकाना बना लिया है।
भय वश बंदी रक्षक चैन की नींद नही ले पाते हैं। जर्जर बिल्डिंग, बैरक को देखते हुए नई जेल बनाने का प्रस्ताव शासन से मंजूरी मिल गई है, लेकिन जमीन नही मिल पा रही है। जबकि कई बार जेल अधिकारियों ने प्रशासन को पत्र लिखा है। बावजूद प्रशासन 60 एकड़ जमीन मुहैया नही करा पा रहा है। एक दो स्थानों पर जो जमीन मिली भी वह 30 से 37 एकड़ ही है। ऐसे एरिया में एक हजार बंदियों की क्षमता की बन नही सकती।