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अस्पतालों में डाक्टर नहीं, बेहतर इलाज का किया जा रहा दावा

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जिला अस्पताल की ओपीडी में इंलाज के लिए बैठे मरीज। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता तो हैं लेकिन चिकित्सकों की कमी है। बात अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की ही करें तो मौजूदा समय में 109 चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। चिकित्सकों के पद खाली होने से इलाज का संकट बढ़ गया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी बनी हुई है। कई सीएचसी और पीएचसी पर तो डाक्टर नहीं होने से ताला बंद करने स्थिति है। कई पीएचसी केवल वार्ड ब्वाय के भरोसे चल रही हैं। वहीं, इस व्यवस्था के बाद भी अधिकारी बेहतर इलाज का दावा करते हैं।
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जिले में 22 सीएचसी, 73 पीएचसी और ब्लाक स्तर के 8 पीएचसी संचालित हो रही हैं। यहां कुल 278 डाक्टरों के पद हैं। लेकिन इन अस्पताल में 109 चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेहतर इलाज का दावा कर रहा है। महकमे के अधिकारी चिकित्सकों की व्यवस्था करने के बजाय कागजी कोरमपूरा करने में जुटे हैं। संक्रामक बीमारियों का दौर चल रहा है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों के मरीजों को इलाज के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ रही है। डाक्टरों की कमी मरीजों का दर्द बढ़ा रही है। डाक्टरों की कमी के कारण लोग प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। सिकरारा क्षेत्र के बांकी अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पर कोई डाक्टर नहीं है। इसे खुद दो दिन पहले जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान देखा। हालांकि उन्होंने सीएमओ डा. लक्ष्मी सिंह से इसे लेकर नाराजगी भी जताई थी और तत्काल सुविधाएं बहाल कराने का निर्देश दिया था। लेकिन बांकी केंद्र पर फार्मासिस्ट की भी तैनाती नहीं हैं। महराजगंज के बदलापुर के क्षेत्रीय विधायक रमेशचंद्र मिश्रा के गोद लिए सीएचसी पर डॉक्टर स्टाफ, नर्स, महिला डॉक्टर, फार्मासिस्ट, कर्मचारी वार्ड ब्वॉय की कमी है। ऑपरेटर नहीं होने के कारण एक्स-रे मशीन बंद पड़ी है। बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चार डाक्टरों की कमी हैं। सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ तथा दंत रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। रामनगर सीएचसी रामनगर पर अधीक्षक ही नहीं है। एक महिला, एक पुरुष डॉक्टर उपलब्ध है। पीएचसी नेवढि़या और गुतवन में कोई डॉक्टर नहीं है। वार्ड ब्वाय के सहारे अस्पताल चल रहा है। जमालापुर पीएचसी में एक डॉक्टर की तैनाती है। मछलीशहर के जमालपुर और बरईपार पीएचसी में डाक्टर नहीं है। कुंवरपुर में एमबीबीएस डाक्टर नहीं है। डोभी के सीएचसी बीरीबारी केंद्र के अधीक्षक डॉक्टर प्रिंस मोदी ने बताया कि एक्सरे टेक्निशियन की कमी है। सफाईकर्मी मई महीने में रिटायर हो गया है। सिंगरामऊ पीएचसी पर प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अभिषेक वर्मा की तैनाती की गई है। काफी समय से एक ही चिकित्सक के भरोसे अस्पताल चल रहा है। सीएचसी सुजानगंज पर डॉक्टर और एक्स-रे टेक्नीशियन का तबादला हो गया है। कोई भी स्पेशलिस्ट नहीं है। पीएचसी बेरमाव, बेलवार में भी कोई डाक्टर नहीं है। पीएचसी धर्मापुर पर महिला चिकित्सक नहीं है।
जिला अस्पताल में नहीं हैं सर्जन और रेडियोलाजिस्ट
जौनपुर। जिला चिकित्सालय में भी चिकित्सकों की काफी कमी है। सर्जन और रेडियोलाजिस्ट और विशेषज्ञों के पर खाली पड़े हैं। इसके कारण मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरी में मरीजों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। जानकारी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे हुए हैं। इसी तरह जिले के तमाम सीएचसी और पीएचसी पर डाक्टरों के पद खाली पड़े हैं।
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वर्जन
चिकित्सकों के स्थानांतरण के कारण चिकित्सक और कर्मचारियों की कमी हो गई है। जिले में डाक्टरों के 109 पद खाली पड़े हैं। जो डाक्टर यहां से गए हैं। उनके स्थान पर कोई ज्वाइन नहीं किया है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी। - डा. लक्ष्मी सिंह, सीएमओ जौनपुर
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