शीतला चौकियां धाम में नवरात्रि की तैयारियों को लेकर साफ सफाई करते पंडा पुजारी लोग। स्रोत-संवाद
मछलीशहर। नारद पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने सूर्योदय काल में संपूर्ण जगत की सृष्टि की थी। चैत्र शुक्ला प्रतिपदा व सृष्टिकाल का प्रथम दिवस होता है। सर्वप्रिय वसंत ऋतु में नव वर्ष का आरंभ जन मन के उल्लास, उमंग एवं आनंद को दो गुना कर देता है। इस वर्ष नवसंवत्सर 19 मार्च को शुरू हो रहा है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इसी दिन सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी। यह दिन विक्रम संवत के नाम से प्रसिद्ध हो गया। आदि शक्ति मां जगदंबा की कृपा प्राप्ति के लिए की जाने वाली पूजा अर्चना के लिए विशेष पर्व वासंतिक नवरात्र का भी शुभारंभ वृहस्पतिवार से ही होगा। भक्त कलश स्थापना कर नौ दिन मां दुर्गा की उपासना करते हैं। यह जानकारी देते हुए कर्मकांड के विद्वान पं. मुरारी श्याम पांडेय ने बताया कि प्रतिपदा व्रत दिनांक 19 मार्च को रखा जाएगा। कलश स्थापना सुबह 6:48 बजे के बाद की जाएगी। महाअष्टमी का व्रत 26 मार्च बृहस्पतिवार को है। जबकि महानवमी (श्रीराम नवमी) का व्रत 27 मार्च दिन शुक्रवार को है, जो 26 मार्च दिन गुरुवार को अष्टमी का व्रत करेंगे वे सभी पारण नवमी में 27 मार्च शुक्रवार को सूर्योदय के बाद सुबह करेंगे या 12 बजे श्री राम जन्मोत्सव मना कर करेंगे लेकिन 12 बजकर 2 मिनट के अंदर ही अष्टमी व्रत वाले हर कीमत पर पारण कर लेंगे तो अष्टमी और श्रीरामनवमी दोनों के व्रत का फल मिल जाएगा। नवरात्र का पूरा व्रत रहते हैं, वे सभी पारण 27 मार्च दिन शुक्रवार को दशमी तिथि में 12 बजे के बाद से सायं 5.30 के अंदर तक करेंगे।