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नेताजी को जौनपुर से था खास लगाव, यहां किए थे अंतिम चुनावी जनसभा

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2022 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी लकी यादव के समर्थन में मल्हनी विधानसभा में प्रचार करने पहु - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन की खबर ने उनसे आत्मिक लगाव रखने वाले लोगों को झकझोर कर रख दिया। उनका जौनपुर से इतना गहरा लगाव था कि जब उन्होंने चुनाव प्रचार से किनारा कर लिया था तब भी जौनपुर में लकी यादव के समर्थन में चुनावी सभा करने आ गए थे। यह पूर्वांचल की उनकी आखिरी चुनावी सभा थी।
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पूर्वांचल को मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है। भले ही उन्होंने आजमगढ़ को केंद्र बनाया हो, लेकिन जौनपुर से उनका गहरा लगाव रहा है। जिले के आठ-दस लोगों से उनके प्रगाढ़ रिश्ते थे। पूर्व मंत्री पारसनाथ यादव से उनकी बेहद नजदीकी थी। उनकी करीबी की वजह से ही पारसनाथ यादव मिनी मुलायम के नाम से जौनपुर में पुकारे जाते थे। वर्ष 1917 के चुनाव में उन्होंने पूर्वांचल में पारसनाथ यादव के समर्थन में एकमात्र जनसभा की थी।
पारसनाथ यादव का निधन कोरोना काल में हुआ था नेताजी तब नहीं आ सके थे, लेकिन उनके पुत्र लकी यादव का चुनाव प्रचार करने वे मल्हनी आए। प्रदेश में उन्होंने दो ही सीटों पर ही प्रचार किया। एक करहल में अखिलेश यादव के समर्थन में और दूसरी लकी यादव के लिए मल्हनी में। विधायक लकी यादव ने बताया कि नेताजी ने कहा कि पारसनाथ के निधन पर नहीं आ पाया, लेकिन उन्हें श्रद्धांजलि देने जरूर आऊंगा। चुनाव में आकर उन्होंने वादा निभाया।
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भाजपा लहर में भी पांच सीटें जिता दीं
अस्वस्थ होने के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने मल्हनी में चुनावी सभा को संबोधित किया। उनके जिले में आने की वजह से ही सपा नौ में से पांच सीटें जीत गई। भाजपा के लिए गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा की थी। इसके बावजूद मल्हनी, मछलीशहर, केराकत, मुंगराबादशाहपुर व जफराबाद में सपा कामयाब रही।
मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज की स्थापना में था योगदान
मुलायम सिंह यादव का मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज की स्थापना में अहम योगदान रहा है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर ने बताया कि वे वर्ष 1994 में आए थे। रक्षामंत्री बनने के बाद 1997 में आए थे। 2013 में मदरसा गुरैनी में भी आए थे। सपा के जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव ने बताया कि नेताजी जब 2004 में यहां आए थे तभी उन्होंने सद्भावना पुल के निर्माण की प्रक्रिया तेज की। यह पुल उन्हीं की देन है।
व्यक्तिगत संबंध भी निभाने में आगे थे नेताजी
पूर्व मुख्यमंत्री सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपने रिश्तों और दोस्ताना संबंधों को निभाने के लिए सदैव जाने जाते थे। उनका जिनसे व्यक्तिगत संबंध था उनके यहां वह जरूर जाते थे। सपा के संस्थापक सदस्यों में रहे पारसनाथ यादव की नजदीकी किस तरह से थी यह हर कोई जानता है। उनसे अच्छे संबंध पूर्व राज्यमंत्री उतरगावां निवासी डॉ. केपी यादव से भी थे। सपा के पूर्व प्रदेश सचिव एवं डॉ. केपी यादव के पुत्र विवेक रंजन यादव बताते हैं कि नेताजी 13 मई 2005 को बहन की शादी में आए थे। उस समय नेताजी मुख्यमंत्री थे।

2005 में स्व केपी यादव गांव उतरगांवा में एक शादी में शिरकत करने पहुंचे थे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम ?- फोटो : JAUNPUR

2005 में स्व केपी यादव गांव उतरगांवा में एक शादी में शिरकत करने पहुंचे थे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम ?- फोटो : JAUNPUR

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