ई-रिक्शा बच्चों से इतने भरे हुए होते हैं कि चालक को हैंडल तक मोड़ने में दिक्कत होती है। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ई-रिक्शे और स्कूली वैन दौड़ रहीं हैं, लेकिन फिर भी अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं, जो बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जनपद में संचालित अधिकतर स्कूली ई-रिक्शा कवर्ड नहीं है। सड़कों पर दौड़ने वाले नाम मात्र के ही ई-रिक्शा पूरी तरह से सुरक्षा के मानकों को पूरा कर रहे होंगे। पूरी तरह से खुले ई-रिक्शा के कारण बच्चों के गिरने की संभावना रहती है। इन रिक्शों पर बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता है।
स्कूल संचालकों ने छोटे वैन में अतिरिक्त सीटें लगवा रखी हैं, जिसमें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं दूसरी तरफ अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा की परवाह किए बिना इन वाहनों पर बच्चों को भेज रहे हैं।
स्कूल में ई-रिक्शा चलाने का प्रावधान ही नहीं है। अभिभावक ही बच्चों को ई-रिक्शा पर भेज रहे हैं। चालक वाली सीट पर बच्चों को बैठाना गलत है। वैसे हम इस स्कूल-स्कूल जाकर वाहनों के फिटनेस की जांच कर रहे हैं। 35 गाड़ियों पर करीब तीन हजार के हिसाब से जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही सभी पंजीकृत वाहन के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। -एसपी सिंह, एआरटीओ