मछलीशहर के छाछो गांव की रामलीला में नारद मोह का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। जफराबाद में रामजन्म और विश्वामित्र आगमन के प्रसंग का मंचन किया गया।
शीलनगर के राजा की पुत्री पर नारद सम्मोहित हो गए। सुंदर स्वरूप पाने के लिए उन्होंने तप किया तो इंद्रदेव घबरा गए। उन्होंने अप्सराओं और कामदेव को तपस्या भंग करने का आदेश देकर भेज दिया। कामदेव ने माया फैलाई और धनुष से पुष्पवर्षा की। अप्सराओं ने नृत्य कर नारद का ध्यान भंग कर दिया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त के मोह को देखा तो उन्होंने भी सुंदर रूप मांगने वाले नारद को वानर का रूप दे दिया, जिससे उनकी शादी नहीं हुई। जब राजकुमारी ने नारद को वरमाला नहीं पहनाई तो स्वयंवर में किसी ने नारद को अपना मुंह दर्पण में देखने को कहा। जब अपना चेहरा देखने के बाद उन्होंने भगवान विष्णु को शाप देते हुए कहा कि मैं स्वयंवर में जिस स्वरूप के कारण अपमानित महसूस कर रहा हूं, एक दिन आपको भी इसी स्वरूप के आगे हाथ जोड़ना होगा। उधर रामलीला समिति जफराबाद की रामलीला के तीसरे दिन अयोध्या के कलाकारों ने पुत्रेष्ठि यज्ञ, रामजन्म, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न जन्म, राक्षसों का अत्याचार, विश्वामित्र का अयोध्या आगमन का लीला का मंचन किया गया। राक्षसों के आतंक को समाप्त करने के लिए अयोध्या में भगवान विष्णु के श्री राम रूप में अवतार लेते ही दर्शकों से खचाखच भर गया। रामलीला स्थल जय श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। राजा दशरथ के महल में पुत्रों के जन्म पर सोहर व बधाईयां गाई गई। अयोध्या के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न राजमहल पहुंचते है। उधर राक्षसों के आतंक से परेशान ऋषि विश्वामित्र राक्षसों से अपने यज्ञादि की रक्षा के लिए अयोध्या पहुंच कर राजा दशरथ को राक्षसों के उत्पात से अवगत कराते हुए उनके विनाश लिए राम-लक्ष्मण को अपने साथ आश्रम ले जाने की मांग करते हैं।