हज के लिए जाने वाले मुसलमानों से कुर्बानी का पैसा भारत सरकार की हज कमेटी के पास जमा कराने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद लोगों ने अटाला मस्जिद के सामने प्रदर्शन किया। नमाजियों ने भारत सरकार के विरोध में नारे लगाए। केंद्र सरकार को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित पांच सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। मरकजी सीरत कमेटी के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में म्रुिस्लमों ने हिस्सा लिया।
ऐतिहासिक अटाला मस्जिद के सामने प्रदर्शन के बाद आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार की सेंट्रल हज कमेटी हाजियों के साथ साजिश कर रही है। प्रत्येक हाजी जब हज के लिए जाता है तो कुर्बानी का पैसा सऊदी अरब सरकार जमा कराती है और कुर्बानी का समय बता देती है। लेकिन इस बार सेंट्रल हज कमेटी उस पैसे को अपने पास जमा करवाना चाहती है।
कुर्बानी के लिए 600 रेयाल जमा न करने वालों को हज से वंचित किए जाने की भी चेतावनी दी गई है। मरकजी सीरत कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद ने कहा कि शिराजे हिंद के नाम से जाने जाने वाले जौनपुर जनपद अपने इल्मों अदब और तारीख पर नाज करता है। तारीख गवाह है मुगल शासक सम्राट अकबर ने जब अपना मजहब दीने इलाही मिशन चलाया तो उसके खिलाफ यहां के सूफियों और ओलमाओं ने विरोध किया। मजबूर होकर अकबर को मिशन को छोड़ना पड़ा था।
राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गए पत्रक में कहा गया है कि राशनकार्ड में सरकार ने महिला सदस्य को मुखिया बनाने का फैसला कर पर्दानशीन महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
सरकार के इस फैसले से मुस्लिम संस्कृति प्रभावित होगी। इसके अलावा मेरठ में 1987 में हुए हाशिमपुरा कत्लेआम के आरोपियों को बरी किए जाने का भी विरोध किया गया। मांग की गई कि यूपी सरकार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दाखिल करे।
इस मौके पर नेयाज ताहिर, शकील मंसूरी, अब्दुल अहद, अनवारुल हक, शम्सुद्दीन, हाजी नेसार अहमद, हाजी अब्दुल आदि मौजूद थे। संचालन अरशद कुरैशी ने किया।