खुटहन। क्षेत्र में गोमती और सेंवई नाले से प्रति वर्ष कई तटवर्ती गांवों के तमाम किसानों का कटाव में बर्बाद हो रही कृषि योग्य भूमि के बचाव के लिए मनरेगा के द्वारा एक बेहतरीन तरीका ढूंढ निकाला गया है। अब नदी और नाले के तट पर मुंगेर बांस खेतो के कटाव से बचाव करेंगे। जिसका शुभारंभ सोमवार को उपायुक्त मनरेगा भूपेंद्र कुमार सिंह ने शेरपुर गांव स्थित सेंवई नाले के तट पर बांस का पौधा लगाकर किया।
उपायुक्त ने कहा कि पूरे जिले में पहला विकास खंड खुटहन है, जहां बांस की खेती की शुरुआत की गई है। नदी और नाले के तटवर्ती 40 गांवों में दो लाख बास के पौधे तीन दिनों के भीतर लगाएं जाने है। बांस की खेती आम के आम गुठुलियों के दाम को चरितार्थ करेगी। इसकी जड़े घनी और दूर तक फैलती है। जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है। वहीं दूसरी तरफ इससे दो साल के भीतर अच्छा मुनाफा आना शुरू हो जाता है। कहा कि बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए 200 व्यक्तिगत लाभार्थी चयनित कर इसकी खेती शुरूआत की जा चुकी है। डीसी मनरेगा ने कहा कि प्लास्टिक की झिल्ली,ग्लाश,पत्तल आदि बंद हो जाने से बांस की उपयोगिता बहुत बढ़ गई है। बास की लकड़ी से पेपर, पत्तल, प्लेट आदि बनाए जाते है। यह कम समय में अधिक विकास करता है। मुंगेर प्रजाति का बास 25 से 30 फिट तक ऊंचा होता है। दो ढाई साल में यह पूरे आकार में आ जाता है।