जौनपुर। अधिक पैदावार की चाह में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग सेे जिले की मिट्टी बीमार हो रही है। मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी तत्वों की मात्रा मध्यम से न्यून स्तर पर पहुंच गई है। जिंक का अभाव हो गया है। जैविक खादों के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता नहीं आई तो आगामी कुछ वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
विश्व मिट्टी दिवस के नाम पर भले ही कुछ कार्यक्रम भर आयोजित कर फर्ज की इतिश्री कर ली जाए, लेकिन बीमार होती मिट्टी से उपज पर असर पड़ने लगा है। जिले की अधिसंख्य आबादी खेती पर ही निर्भर है। धान, गेहूं, मक्का की प्रमुख फसलें हैं। प्रतिकूल मौसम और महंगे होते संसाधन के बीच खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर है। इसके लिए वह रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता निरंतर घटा रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सात-आठ साल पहले तक जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक जैसे तत्वों की प्रचुर मात्रा थी। धीरे-धीरे यह मध्यम श्रेणी में आए और अब न्यून श्रेणी में पहुंच गए हैं। जिंक तो नाम मात्र का रह गया है। जीवाश्म कार्बन की मात्रा महज 0.2 से 0.5 प्रतिशत तक ही रह गई है। जीवाश्म कार्बन मिट्टी के लिए वही भूमिका निभाता है, जो मानव शरीर में खून। इसकी कमी से नाइट्रोजन, पौटैशियम, सल्फर, मैनीज, बोरान जैसे 16 पोषक तत्व कम होने लगते हैं। स्वस्थ मिट्टी में जीवाश्म कार्बन 0.8 पीपीएम से अधिक होना चाहिए।
जैव उर्वरक से बढ़ाए मिट्टी उर्वरता
कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के वैज्ञानिक डॉ. सोमेंद्र नाथ बताते हैं कि मृदा में जरूरी तत्वों का अभाव चिंताजनक है। इसमें सुधार के लिए जैव उर्वरक का इस्तेेमाल ही सबसे कारगर तरीका है। किसान रासायनिक उर्वरकों की बजाए जैव उर्वरकों को प्राथमिकता दें। हर फसल की बोवाई से पहले मृदा की जांच अवश्य कराएं और उसमें मौजूद तत्वों के आधार पर ही खेती करें। कंपोस्ट खाद, केंचुए की खाद हर तरह से उपयोगी है। उप निदेशक कृषि जयप्रकाश का कहना है कि मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं मृदा उर्वरता को अक्षुण्ण बनाने के लिए सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। मृदा में जीवाश्म कार्बन बढ़ाने के लिए हर राजस्व गांव में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट के निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। इस सत्र में कुल 3287 वर्मी कंपोस्ट संरचना के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रति यूनिट पर अनुदान भी दिया जा रहा है।
जिले में कहां-कैसी है मिट्टी
जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी का स्वभाव अलग है। बदलापुर, बक्शा, करंजाकला, धर्मापुर, सिरकोनी, शाहगंज, डोभी, सुईथाकला, सिकरारा, केराकत, मुफ्तीगंज, जलालपुर में बलुई दोमट मिट्टी है। वहीं रामनगर, मड़ियाहूं, महराजगंज, बरसठी, मछलीशहर और मुंगराबादशाहपुर में दोमट मिट्टी है।