जौनपुर। कुछ माह पहले तक कोविड अस्पतालों में मरीजों को रखने की जगह नहीं थी। जिले में एक साथ चार-चार अस्पताल चल रहे थे। अब एक अस्पताल में भी बेड खाली हो गए हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में निर्णायक जीत की ओर जिला तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिला महिला अस्पताल के मातृ-शिशु केंद्र में संचालित कोविड-19 अस्पताल में अब सिर्फ सात मरीज बचे हैं। हालांकि चार दिन पहले मरीज की संख्या सिर्फ एक थी। पिछले तीन दिनों में नए मरीज मिलने के बाद संख्या में थोड़ा इजाफा हुआ है।
जिले में कोरोना का कहर मार्च में शुरू हुआ था। 23 मार्च को पहला मरीज मिलने के बाद से लगातार इसमें वृद्धि होती रही। मई-जून में बड़ी संख्या में प्रवासियों के आने के बाद एक दिन में सौ से अधिक मरीज मिलने लगे थे। मरीजों को रखने के लिए पूर्व में बने ढाई सौ बेड के अस्पताल, जलालपुर का रेहटी सीएचसी, जिला अस्पताल और मीरपुर में चार कोविड-19 अस्पताल एक साथ चल रहे थे। फिर भी मरीजों के लिए जगह नहीं मिल रही थी। इसके चलते मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जाने लगा। इस बीच अब कोरोना संक्रमण की रफ्तार में काफी कमी आई है। एक-एक कर तीन अस्पताल खाली कर दिए गए हैं। जिला महिला अस्पताल में सौ बेड के मातृ-शिशु केंद्र में ही एक कोविड अस्पताल चल रहा है। इसमें भी सिर्फ सात मरीज हैं। जिले में कुल एक्टिव केस 53 हैं। इनमें 13 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। दस का वाराणसी, आठ का लखनऊ, चार का प्रयागराज और दो का प्रदेश के अन्य जिलों में उपचार चल रहा है। कुछ ऐसे भी मरीज हैं, जो जांच कराने के बाद अन्य प्रांतों में चले गए और वहां आइसोलेट हुए हैं। मरीजों की कमी के बाद खाली हुए तीनों अस्पतालों को अब स्थायी रूप से बंद करने पर विचार चल रहा है। जिला महिला अस्पताल में सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में सात मरीजों का इलाज चल रहा है। चार दिन पहले केवल एक मरीज ही अस्पताल में बचा था, लेकिन लगातार जांच के कारण कुछ नए मरीज मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या कम हो जाने के कारण केवल एल-टू अस्पताल का संचालन हो रहा है।