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सुबह हो या शाम, बस जाम ही जाम

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01- पालिटेक्निक से ओलन्दगंज रोड पर आधी सड़क पर खड़ी बाईकें। - फोटो : JAUNPUR
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ध्यानार्थ... खबर से संबंधित चार स्पीक अप भी भेजी जाएगी...
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फोटो-
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- यातायात माह में ही शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने में महकमा नाकाम
- बेतरतीब पार्किंग और बदहाल सिस्टम से जूझ रहे राहगीर, हो रही फजीहत
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। जाम... जाम और बस जाम। सोमवार को शहर की यही स्थिति रही। जाम की जद में जकड़ा शहर पूरे दिन रेंगता रहा। कहीं बेतरतीब पार्किंग के कारण तो कहीं बदहाल यातायात व्यवस्था के कारण। कदम-कदम पर शहर में वाहनों के पहिए थम जा रहे थे। ओलंदगंज तिराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट रोड और जेसीज चौराहा तक जाम का ऐसा आलम रहा कि कइयों ने तो रास्ता ही बदल दिया। व्यवस्था सुधारने में लगे पुलिस-पीआरडी और होमगार्ड के जवान डांटते-फटकारते, लाठियां पटकते रहे, लेकिन राहगीर इससे बेखबर मनमाने ढंग से आगे बढ़ते रहे। इस दौरान यातायात नियमों की धज्जियां भी खूब उड़ती रही।
वैसे तो शहर के लिए जाम कोई नई समस्या नहीं है, मगर सोमवार को जाम की स्थिति काफी भयावह रही। सुबह दस बजते-बजते जाम का जो क्रम शुरू हुआ, वह पूरे दिन बरकरार रहा। रुहट्टा से ओलंदगंज मार्ग पर तिराहे के पास वाहनों की कतार लगनी शुरू हुई, जो देखते-देखते ओलंदगंज, नखास से जेसीज चौराहा तक पहुंच गया। कलेक्ट्रेट तिराहे पर भी भीषण जाम रहा। यहां कर्मचारियों, फरियादियों, अधिवक्ताओं और वादकारियों की भीड़ जाम से जूझती रही। जीवित प्रमाण पत्र के लिए ट्रेजरी आ रहे बुजुर्ग और दफ्तर की ओर बढ़ रहे कर्मचारी इस व्यवस्था से आहत दिखे। यातायात पुलिस के कुछ जवान भीड़ के बीच खड़े होकर व्यवस्था सुधारने की मशक्कत कर रहे थे, लेकिन अपने रुतबे और प्रभाव का धौंस जमाकर वाहन चालक उनकी बातों को अनसुना करते रहे। कई बार जवान को लाठियां तानने तक की नौबत आई, बावजूद मनमानी के आदी लोगों की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा। सबसे पहले जाने के लिए वह ट्रैफिक नियमों को दरकिनार कर आगे बढ़ते नजर आए। जाम का कमोवेश यही हाल वाजिदपुर तिराहा से जेसीह सिपाह होते हुए पचहटिया तक रहा। कोतवाली, चहारसू चौराहा, पॉलीटेक्निक नईगंज, पुलिस लाइन, जोगियापुर के इलाके भी जाम से अछूते नहीं रहे। चौराहों-तिराहों पर खड़ी पुलिस असहाय और लाचार नजर आई। बेतहाशा जाम में फंसे लोगों के मुंह से बरबस ही निकलता रहा कि हे राम, कब खत्म होगा यह जाम।
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जाम के यह हैं प्रमुख कारण:
* पटरियों पर कब्जा, सड़कों पर पार्किंग
जाम की सबसे मुख्य वजह शहर की संकरी सड़कों पर अवैध पार्किंग है। पटरियां अतिक्रमण से कराह रही हैं। पैदल चलने की जगह नहीं है। दुकानों के सामने वाहन खड़े होने से सड़क और सिकुड़ जाती है। ऐसे में अगर कोई एक बड़ा वाहन भी इस ओर घुस जाए तो फिर जाम लगना स्वाभाविक है।
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* रेलवे क्रॉसिंग का बंद होना
शहर में तीन तरफ से रेलवे क्रॉसिंग है। इन क्रॉसिंग से अमूमन हर 20 मिनट पर एक ट्रेन गुजरती रहती है। ट्रेन को निकालने के लिए जैसे ही क्रॉसिंग बंद होता है, वाहनों की कतार लगनी शुरू हो जाती है। इसी में तमाम लोग रांग साइड से घुसने की कोशिश करते हैं तो फिर जाम भयावह हो जाता है।
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* ट्रैफिक नियमों के प्रति बेपरवाही
ट्रैफिक नियमों के प्रति बेपरवाही भी जाम की मुख्य वजह है। शहर में चलने वाले ज्यादातर राहगीर यातायात नियमों के प्रति जागरुक नहीं है। लिहाजा अक्सर वह गलत दिशा से आगे जा रहे वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं। जाम लगने के बाद बाइक, ई-रिक्शा चालक तो आगे निकलने की होड़ में सब कुछ भूल जाते हैं। इससे पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है। यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने के लिए शुरू किया गया यातायात माह कोई असर नहीं दिखा पा रहा।
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* स्कूल बसों पर अंकुश नहीं
कुछ माह पहले ही यह योजना बनी थी कि स्कूल बसों को शहर के व्यस्त इलाकों में नहीं प्रवेश दिया जाएगा। इसके बजाए स्कूल संचालकों को इन क्षेत्रों में छोटे वाहन भेजने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद स्कूल संचालक मनमानी से बाज नहीं आ रहे। शहर से बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बसों को ही भेजा जा रहा है। दोपहर में स्कूल की छुट्टी होते ही अचानक अलग-अलग स्कूलों की कई बसों के शहर में प्रवेश से हालात बिगड़ जाते हैं। कई बस तो गलियों में भी घुस जाती हैं।
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समाधान चाहिए तो हम भी सुधरें...
जाम की समस्या के समाधान के लिए सिर्फ यातायात पुलिस या प्रशासन के भरोसे रहना सही समाधान नहीं है। इसके लिए हमें भी सुधरने की जरुरत है। जाम के दौरान यह अक्सर देखने को मिलता है कि खुद जाम से निकलने के लिए हम जैसे-तैसे आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। इसमें कई बार गलत दिशा से घुसने के चलते जाम और बढ़ जाता है। यही नहीं कुछ दूर जाने के लिए भी वाहन के इस्तेमाल से भी समस्या बढ़ रही है। बाइक या कार की संख्या सड़क पर लगातार बढ़ती जा रही है। बेहतर होता कि इन कार्यों के लिए पैदल या सवारी वाहनों का इस्तेमाल किया जाए।
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वर्जन...
शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हरसंभव प्रयास हो रहे हैं। हर प्रमुख चौराहे-तिराहे पर यातायात पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी के जवानों को लगाया गया है, जो पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। जाम की एक प्रमुख वजह रेलवे क्रॉसिंग का बार-बार बंद होना भी है। वैसे सभी पहलुओं पर विचार कर उच्चाधिकारियों के साथ मिलकर स्थाई समाधान का प्रयास किया जा रहा है। -विनोद सिंह, यातायात निरीक्षक
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जाम से जुड़ा स्पीकअप...
रोज-रोज लग रहे जाम से आजिज हो चुके हैं। काफी समय तो बस जाम से निकलने में ही लग जाते हैं। जिम्मेदार इसके स्थाई समाधान के दावे करते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं। -संतोष विश्वकर्मा
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बाजार में सामान खरीदने निकलें तो आधा-एक घंटा का समय तो बस जाम से ही जूझने में चला जाता है। हर चौराहे पर जाम की स्थिति है। पुलिस के लोग खड़े तो हैं, मगर कोई असर नहीं दिख रहा। -धर्मेंद्र यादव
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जब तक शहर में पार्किंग और पटरियों से अतिक्रमण हटाने का प्रयास नहीं होता, जाम की समस्या का समाधान मुश्किल है। जिम्मेदारों को ठोस कार्ययोजना बनाने की जरुरत है। -पंचम सिंह
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जाम के कारण दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है। अब तो तमाम ग्राहक इसलिए शहर में आने से हिचकते हैं कि कहीं जाम में न फंस जाए। सख्ती से स्थाई समाधान होना चाहिए। -दिनेश साहू
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