चंदवक। वाराणसी-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रभावित किसानों के मुआवजे को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद अजीब और बड़ा मामला सामने आया है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूर्वांचल किसान संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि किसानों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए भेजे गए 'धन्यवाद पत्र' को अफसरों ने बिना पढ़े ही 'शिकायत' मान लिया। इतना ही नहीं, इसे आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कर विभिन्न विभागों को कार्रवाई के लिए भी दौड़ा दिया।
पूर्वांचल किसान संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह डोभी ने बताया कि एनएच-233 से प्रभावित किसानों को करीब 14 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद अब जाकर बकाया मुआवजा मिलना शुरू हुआ है। शासन की इस सकारात्मक पहल से खुश होकर किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए एक पत्र तैयार किया था।
अजीत सिंह ने बताया कि बीते 29 मई को वह लखनऊ में 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री किसी कार्यवश बाहर जा रहे थे, जिसके कारण उनसे सीधे मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद अजीत सिंह ने इस पत्र को मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस अनुरोध के साथ सौंपा कि इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया जाए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब शुक्रवार को केराकत तहसील के अधिकारियों ने अजीत सिंह को फोन कर बताया कि उनके द्वारा दिए गए ''शिकायत पत्र'' की जांच चल रही है। यह सुनते ही किसान नेता का माथा ठनक गया। जब उन्होंने अधिकारियों से मिलकर पूरा मामला स्पष्ट किया, तो तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
किसान संगठन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने पत्र की विषय-वस्तु (कंटेंट) को पढ़ने या समझने की थोड़ी भी जहमत नहीं उठाई और आँख मूंदकर उसे शिकायत पत्र मानकर पोर्टल पर दर्ज कर दिया। इसके बाद यह पत्र मुख्यमंत्री आवास और मुख्यमंत्री कार्यालय से होते हुए जिलाधिकारी जौनपुर, भू-अभिलेख राजस्व अधिकारी और एनएचएआई कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई के लिए प्रेषित (फॉरवर्ड) होता रहा।
जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन ने बताया कि यह चूक या लापवाही नहीं है। हर प्रार्थना पत्र को रिकॉर्ड में लिया जाता है, दाखिल दफ्तर करने के क्रम में इस प्रार्थना पत्र को भी लिया गया है।