ओस की फुहारों के साथ चली शीतलहर ने मंगलवार को लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। पारा लुढ़क कर नौ डिग्री सेल्सियश तक पहुंच गया और लोग ठिठुरने लगे। गर्म कपड़ों के अंदर भी गलन महसूस की गई। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बढ़ती ठंड गेहूं के किसानों के लिए तो बेहतर मानी जा रही है, लेकिन दलहनी और सरसों के लिए जानकार इसे खतरा मान रहे हैं।
ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को इस सीजन में अब तक का सबसे ठंडा दिन महसूस किया गया। सुबह की शुरुआत सर्द हवाओं के झोंकों के साथ हुई। गलन भरी हवाओं ने स्कूल जाने वाले मासूमों के चेहरे सुर्ख कर दिए। सिर से पांव तक कपड़ों से लदकर बच्चे स्कूल गए। दस दिनों से लोगों के लिए मुसीबत बनी ठंड ने मंगलवार को तेवर और तल्ख कर दिए।
ठंडी हवाओं के साथ गिरीं ओस की फुहारों से लोग ठिठुरने लगे। पूरे दिन सूर्य के दर्शन नहीं हुए। हवा में नमी बढ़ने के कारण गीले कपड़े सुखाने के लिए भी महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। तेजी से बढ़ती ठंड में कोहरे के चलते आलू, सरसों और अरहर की फसलों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक और फसल वैज्ञानिक डा. सुरेश कनौजिया के मुताबिक ठंड गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेय नहीं है। लेकिन, दलहनी और तिलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
ऐसे मौसम में आलू को पाला मारने का खतरा बना रहता है। अरहर के फूल झड़ने लगते हैं और सरसों में माहो लगने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। माहो से बचने के लिए किसानाें को इमिडाक्लोर प्रिड की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। वहीं पान की फसल के बारे डा. सुरेश का कहना है कि कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा पान की खेती के लिए भी नुकसानदेय साबित हो सकता है। पान की फसल पर इस मौसम का असर धूप निकलने के बाद दिख सकता है। एफिड कीड़े के प्रकोप से पान की पत्तियां सिकुड़ कर खराब हो जाती हैं। इससे निपटने के लिए किसानों को निमौली नामक जैविक पदार्थ का छिड़काव करना चाहिए। गौरतलब है कि जिले के महाराजगंज, मल्हनी आदि क्षेत्रों में पान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।