राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों के लिए सभी मर्ज की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कुछ दवाएं मिलती हैं तो कुछ बाहर से लिख दी जाती हैं। दवा के लिए मरीजों को भटकना पड़ता है।
सिकरारा के भरतपुर में चार कमरे का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहा है। अस्पताल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। एक डाक्टर के साथ एक कंपाउंडर, एक वार्ड बॉय और एक सफाई कर्मचारी की तैनाती है। नजदीक कोई अस्पताल न होने के कारण आसपास के मरीज इलाज के लिए यहां आते हैं। डाक्टरों की मानें तो प्रतिदिन करीब 25 से 30 मरीज आते हैं। मरीजों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल से सभी दवाएं नहीं मिल पाती हैं। कुछ बीमारियों की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। दवाएं न मिलने से मरीज यहां आने से कतराते हैं।
पुराने आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में ही 10 करोड़ की लागत से 30 बेड का नया आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भूमि की पैमाइश होने के बाद पेड़ों की कटाई कराई जा रही है। सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। अस्पताल भवन बनाने के लिए यूपीसीएल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अस्पताल का भवन बन जाने के बाद इलाज की सुविधा बढ़ेगी। लोगों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।