जौनपुर। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शासन का आदेश है कि मिड-डे-मिल स्टील के बर्तन में पकाया जाए। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम बुधवार को जिले के 2807 परिषदीय स्कूलों में हकीकत जानने पहुंची। पता चला कि 1123 स्कूलों में मिड-डे-मिल एल्यूमिनियम के बर्तन में पकाए जा रहे हैं। वहीं, 1684 स्कूलों में सब्जी बनाने के लिए लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं, लोहे के तवे पर ही रोटी भी पकाई जा रही थी। जिले के सभी स्कूलों में बच्चों को स्टील की प्लेट में भोजन कराया जा रहा था।जिले के मड़ियाहूं, मछलीशहर, जफराबाद, सिकरारा, डोभी, केराकत, बदलापुर, गौराबादशाहपुर, सुइथाकला, खुटहन, तेजीबाजार और सिंगरामऊ क्षेत्र के ज्यादातर स्कूलों में एल्यूमिनियम के बर्तनों का प्रयोग हो रहा था।
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लोहे की कड़ाही में बनती है सब्जी और पूड़ी
तेजीबाजार क्षेत्र के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के रसोई घर में लोहे की बड़ी कड़ाही देखकर टीम ने प्रधानाध्यापक से पूछा कि इसमें क्या बनता है। इस पर उन्होंने कहा कि लोहे की कड़ाही में पूड़ी और सब्जी बनाई जाती है। दिलशादपुर, बहुउद्दीनपुर, विरसादपुर, मरगूपुर, कपूरपुर, भोशीला, मितावा, मैनुद्दीनपुर गांव के स्कूलों में लोहे की कड़ाही मिली।
राख-मिट्टी से होती है बर्तन की सफाई
टीम ने यह भी देखा कि जिले के ज्यादातर स्कूलों में बर्तनों की सफाई के लिए राख-मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बर्तन साफ करने के लिए वॉशिंग साबुन या डिटर्जेंट नहीं था। जो नियमानुसार गलत है। सुइथाकला क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों और उच्च माध्यमिक स्कूलों में बच्चों के हाथ धोने के लिए हैंडवाश और साबुन भी नहीं मिला। हाथ पोंछने के लिए तौलिया भी नहीं था।
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डॉक्टरों का ये है मानना
- एल्यूमिनियम शरीर में न्यूरोटॉक्सिन की तरह काम करता है। बच्चों की याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और आईक्यू पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
- एल्यूमिनियम के बर्तन में खाने से कैल्शियम और फॉस्फोरस का अवशोषण रुकता है, जिससे हड्डियां कमजोर होती हैं और शारीरिक विकास बाधित होता है।
- शरीर में आयरन को सही से अवशोषित नहीं होने देता, इससे हीमोग्लोबिन कम हो सकता है और बच्चे में थकान व सुस्ती रहती है।
- संवेदनशील पेट और आंतों में जलन, बार-बार एसिडिटी, पेट दर्द और अपच का कारण बनता है।
- शरीर में जमा एल्युमिनियम को बाहर निकालने के लिए बच्चे के नाजुक अंगों (गुर्दे और यकृत) पर अतिरिक्त भार पड़ता है।
- एल्यूमिनियम के लगातार संपर्क से बच्चे की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है।
नोट - ये सलाह वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व प्रदेश प्रवक्ता, नीमा (नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन) डॉ. ओपी सिंह ने दी है।
एमडीएम का भोजन स्टील के बर्तनों में ही तैयार करने का शासन से निर्देश है। स्टील के बड़े बर्तन उपलब्ध नहीं होने के कारण कहीं-कहीं दूसरे बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सभी स्कूलों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। एल्यूमिनियम के बर्तनों का इस्तेमाल कम करने के निर्देश दिए गए हैं। भोजन तैयार करने में स्टील के बर्तनों को ही प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। जहां एल्यूमिनियम के बर्तन प्रयोग हो रहे हैं उसे रोकने के लिए कहा जाएगा। समीर, बीएसए