शीतला चौकियां धाम में मां शीतला के दर्शन के लिए कतार में लगकर दर्शन करते श्रद्धालु। स्रोत-संवाद
धर्मापुर। मां शीतला चौकिया धाम में नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पीली चुनरी और गुलाबी साड़ी में मां का स्वरूप दमक रहा था। मंदिर के महंत ने मेवा, फल से भोग लगाकर मां कालरात्रि की उपासना की। भोर में कपाट खुलने के बाद माता शीतला का पीली चुनरी, गुलाबी साड़ी, दौना, लाल गुलाब, अड़हुल, गेंदा के फूलों से बनी माला से शृंगार किया गया। शृंगार के बाद आरती की गई। आरती के बाद से ही श्रद्धालु बारी-बारी से दर्शन करते रहे। मां शीतला के दर्शन के बाद बाबा काल भैरव का भी श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया। शाम के चार बजे तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि नवरात्रि के सातवें दिन (महासप्तमी) के दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है। जो दुष्टों का विनाश और भय का नाश करती हैं। इस दिन सुबह स्नानादि के बाद नीले या लाल वस्त्र पहनकर पूजा करें। माता को गुड़ से बनी मिठाई रातरानी या लाल फूल अर्पित करें और ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै... मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है। पुजारी शिव कुमार पंडा ने कहा कि मां कालरात्रि का रंग काला है। वह गर्दभ पर सवार हैं। उन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है। माता कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से रात्रि के समय करना उत्तम माना जाता है। दुर्गा सप्तशती पाठ, वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन, पूजन, जयकारों एवं घंटों की गूंज से मंदिर परिसर गूंजता रहा। मां मैहर मंदिर में भी दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। उधर, नगर के सिटी स्टेशन रोड ओवरब्रिज के समीप स्थित मां आद्याशक्ति दक्षिणा काली के दर्शन-पूजन की भीड़ रही। दक्षिणा काली का भव्य शृंगार कर दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। श्रद्धालुओं ने नारियल, चुनरी व अड़हुल की माला अर्पित कर हाजिरी लगाई। कालरात्रि के दिन दक्षिणा काली मंदिर पर राष्ट्रीय हिंदू भगवा वाहिनी की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अंजना सिंह के नेतृत्व में महिलाओं ने देवी पचरा गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्रधान पुजारी भगवती सिंह वागीश ने कहा कि मां काली की उपासना से जीवन में सुख शांति, आरोग्यता, शत्रु नाश होता है।