जेसीज-वाजिदपुर के बीच सड़क किनारे फेंका गया कूड़ा।
तकरीबन 45 लाख से अधिक की आबादी वाले इस जिले में खासकर शहरों में हर गली और मोहल्ले में लोग मच्छरों के भिनभिनाहट और उनके काटने से लोग तंग हैं। मच्छरों से परेशान लोगों की जुबां पर उनके काटने और नींद के बिसरने का दर्द है। लोगों का कहना है कि हर जगह गंदगी और कूड़े का ढेर रहेगा तो मच्छर बढ़ेंगे ही। इसके उन्मूलन के लिए जिम्मेदार विभाग की ओर से यथोचित कदम न उठाने से लोगों में जबरदस्त नाराजगी है।
आलम यह है कि शहर की आबादी तकरीबन तीन लाख की है और यहां 190 टन कचरा रोज निकल रहा है। इसके अलावा मेडिकल कचरा भी है। मेडिकल कचरे और कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। जहां तहां सड़क के किनारे और आबादी के बीच में ही कूड़ा फेंक दिया जाता है। चहुंओर फैली गंदगी से धीरे धीरे बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की शिकायत शुरू हो गई है।
प्रशासनिक इंतजाम को लेकर भी लोगों में गुस्सा है। दोपहर तक नगरपालिका कूड़ा सड़कों से हटाता है। जबकि आठ बजे से पहले शहर से कूड़ा हट जाना चाहिए। ओलंदगंज में अक्सर कूड़ा हटाने के दौरान जाम लग जाता है। कई मोहल्लों में कूड़ा वैसे ही छोड़ दिया जाता है। बाल न्यायालय के अध्यक्ष संजय उपाध्याय का कहना है कि प्रशासन का ध्यान इस तरफ नहीं है।
जबकि यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि 90 फीसदी बीमारियां गंदगी और पानी की वजह से होती हैं। डेंगू से जिले में कई लोग पीड़ित हो चुके हैं। समाज सेविका डा. विमला सिंह का कहना है कि शाम होते ही मच्छरों की भिनभिनाहट शुरू हो जाती है। ठीक से घर में बैठा भी नहीं जाता है। इससे मच्छर जनित बीमारियां फैल रही हैं। लेकिन मलेरिया विभाग और नगरपालिका छिड़काव की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. तेज सिंह का कहना है कि कूड़े के ढेर और गंदगी , जल जमाव से मलेरिया, फाइलेरिया के अलावा मस्तिष्क ज्वर भी फैलता है। इसके वायरस तेजी से फैलते हैं। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में मस्तिष्क ज्वर के तीन संभावित मरीज आ चुके हैं। सभासद इरशाद मंसूरी का कहना है कि कूड़ा उठान और कूड़ा निस्तारण की ठोक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। और साफ सफाई की बेहतर व्यवस्था नगरपालिका परिषद द्वारा किया जाना चाहिए।