जौनपुर। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस चित्रकूट की जेल में विभिन्न मामलों में बंद आरोपियों की हत्या के बाद जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जौनपुर की जेल भी सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील है। डेढ़ सौ साल पुरानी इस जेल में न तो जैमर है और न ही मजबूत दीवारें। सीसीटीवी कैमरे भी सभी बैरकों में नहीं हैं। कई बार यहां बंदियों के बीच आपस में और बंदी रक्षकों के बीच टकराव हो चुका है। जेल को शहर से दूर शिफ्ट करने के लिए पांच साल से प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक रजिस्ट्री का काम भी पूरा नहीं हो सका है। आधे किसानों की ही जमीन रजिस्ट्री हो सकी है। बाकी किसानों की जमीन रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस में खर्च होने वाले बजट का इंतजार हो रहा है। जर्जर हो चुकी पुरानी जेल में आपराधिक घटनाओं की आशंका बराबर बनी रहती है।
शहर से दूर सीहीपुर के पास नई जेल बनाए जाने के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया करीब पांच साल पहले ही शुरू कर दी गई थी। 343 किसानों की भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। मुआवजे के लिए शासन ने वर्ष 2016 में ही 66 करोड़ रुपये अवमुक्त किए थे। जेल अधीक्षक एसके पांडेय का कहना है कि अभी आधे किसानों से जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकी है। जमीन की रजिस्ट्री के लिए सरकार ने स्टांप तो निशुल्क किया है, लेकिन रजिस्ट्रेशन फीस पहले प्रति रजिस्ट्री पर 20 हजार रुपये थी, बाद में रजिस्ट्रेशन शुल्क एक प्रतिशत कर दी गई। जबकि इस मद में सिर्फ 26 लाख रुपये मिले थे। जिससे रजिस्ट्रेशन फीस वाले मद में बजट घट गया। बजट की डिमांड शासन से की गई है। बजट मिलते ही बाकी किसानों की जमीन रजिस्ट्री कराई जाएगी। जमीन रजिस्ट्री के बाद जेल का नक्शा तैयार करने से लेकर उसके निर्माण तक की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को दी जाएगी।
बैरकों से निकलकर बंदियों ने किया था पथराव
चार जनवरी 2021 को जिला कारागार में बंदियों के मुलाकातियों से खाने के सामान को लेकर विवाद के बाद बंदी बैरकों से बाहर आकर पथराव करने लगे थे। जीर्ण शीर्ण शौचालय की ईंट उखाड़कर ईंट के टुकड़े एकत्र कर लिए थे। उस वक्त जेल प्रशासन को पगली घंटी बजाने के साथ ही पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। उस दिन तो जेल प्रशासन के समझाने-बुझाने पर बंदी बैरकों में लौट गए, लेकिन बंदी भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। प्रशासन ने किसी तरह बंदियों को समझा कर भूख हड़ताल समाप्त कराई थी। जेल के बिगड़ते माहौल को देखते हुए डीएम के आदेश पर चार बंदियों को रातों रात नैनी, गाजीपुर, वाराणसी और सुल्तानपुर की जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया था।
जेल में पिटाई से बंदी की मौत पर हुआ था बवाल
पांच जुलाई 2015 को जिला जेल में महिला बंदी रक्षक के साथ छेड़खानी से उपजे विवाद में जहां एक बदमाश की पिटाई से मौत हो गई थी, वहीं बंदियों की पिटाई और पथराव में छह बंदीरक्षक घायल हुए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले, 50 राउंड रबर की गोलियां दागनी पड़ीं थीं। शाम साढ़े चार बजे से जेल में शुरू हुआ हंगामा रात 10 बजे नियंत्रित हो सका था। जेल प्रशासन के आरोपों के मुताबिक उस घटना में महिला बंदी रक्षक के साथ आर्म्स एक्ट में बंद बक्शा थाना क्षेत्र के लखौवां गांव निवासी श्याम कुमार यादव (22) ने छेड़खानी कर दी थी। जिससे अन्य बंदी रक्षकों ने श्याम यादव की पिटाई कर दी। जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस खबर के बाद बंदी उग्र हो गए और कई बंदी रक्षकों की लाठी छीनकर कैदियों ने उन्हीं की पिटाई कर दी थी।
जेल की सुरक्षा के लिए हर एहतियात बरते जा रहे हैं। जेल के स्टाफ की लापरवाही से ही अंदर अवैध सामग्री पहुंचती है। इसके लिए मुख्य गेट पर पीएसी के सिपाहियों से तलाशी कराई जाती है। यहां जेल के अफसरों की भी तलाशी लेते हैं। -एसके पांडेय, जेल अधीक्षक।