पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में बुधवार को नैक मूल्यांकन की तैयारी पर चर्चा की गई। कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने सभी सहायक कुलसचिव और अधीक्षकों को निर्देश दिया कि पूरे 6 साल का डाटा तैयार कर कमेटी को दो दिन में प्रेषित करें। नैक मूल्यांकन के सभी बिंदुओं की सूचनाओं का सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट होना जरूरी है।
लखनऊ नैक मंथन की मीटिंग से लौटने के बाद उन्होंने बैठक में सभी निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया। परीक्षा विभाग से परीक्षा फार्म भरने से लेकर परीक्षाफल घोषित होने तक की सभी प्रक्रियाओं का विवरण मांगा गया है। कुलसचिव महेंद्र कुमार ने सभी मातहतों को निर्देश दिया कि समस्त सूचनाएं हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में दो दिन के अंदर हर हाल में उपलब्ध कराएं ताकि नैक मूल्यांकन तैयारी समय से पूरा किया जा सके। नैक मूल्यांकन के संबंध में 22-23 अप्रैल को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन डा. रजनीश भास्कर कराएंगे। जिसमें विवि के सभी अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। संचालन आइक्यूएसी के समन्वयक प्रो. मानस पांडेय ने किया। बैठक में एफओ संजय राय, परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह, सहायक कुलसचिव अमृतलाल, बबीता सिंह, प्रो. देवराज सिंह, डा. प्रदीप कुमार, डा. रवि प्रकाश, डा. आशुतोष कुमार सिंह, डा. जान्हवी श्रीवास्तव, डा. आलोक व डा. आरके जैन उपस्थित रहे।
मूल्यांकन केंद्र का कुलपति ने किया निरीक्षण
पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर पाठ्यक्रमों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य का निरीक्षण बुधवार को कुलपति प्रो निर्मला एस मौर्य ने किया। कुलपति ने कहा कि पाठ्यक्रमों का सही समय पर परीक्षाफल घोषित हो जाए इसके लिए विश्वविद्यालय समयबद्ध तरीके से मूल्यांकन का कार्य प्रारंभ कर दिया है। शिक्षकों को समय से मूल्यांकन के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों से मूल्यांकन के संबंध में जानकारी भी ली।
तकनीकी सेल के समन्वयक डा. अमरेन्द्र सिंह ने बताया कि परिसर परीक्षाओं का समय से परीक्षाफल आए इसके लिए सेमेस्टर परीक्षाओं के साथ ही मूल्यांकन भी शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षक मूल्यांकन कार्य में पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। जिससे हम शीघ्र ही मूल्यांकन कार्य को संपन्न कराते हुए परीक्षाफल देंगे। मूल्यांकन एवं परीक्षाफल के लिए डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर एवं डा. प्रवीण सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, सत्यम उपाध्याय, सतीश सिंह, लाल बहादुर आदि को जिम्मेदारी दी गई।