दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान उन्हें ‘रामसुंदर पंडित’ के नाम से पहचान मिली। उनके पिता कामता प्रसाद पाठक सामान्य किसान थे। आजीविका की तलाश में रामसुंदर वर्ष 1900 के आसपास दक्षिण अफ्रीका गए थे। दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए उनके व्यक्तित्व और विचारों से महात्मा गांधी भी प्रभावित हुए। बताया जाता है कि वहां भारतीयों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और भेदभाव के खिलाफ जब सत्याग्रह की शुरुआत हुई तो रामसुंदर उसमें सक्रिय रूप से शामिल हुए। 11 नवंबर 1907 को सत्याग्रह के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।
जेल में उन्हें महात्मा गांधी से उच्च श्रेणी की सुविधा मिलने का उल्लेख है। (संवाद)